मसकनवा में ध्रुव चरित्र की कथा सुनकर भावविभोर हुए श्रद्धालु
1 min read
4,173 views
रिपोर्ट :-प्रदीप कुमार गुप्ता
मसकनवा गोण्डा :-मसकनवा बाजार में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन अयोध्या धाम से आए हुए कथावाचक मुक्तामणि शास्त्री ने ध्रुव और सती चरित्र का प्रसंग सुनाया। ध्रुव चरित्र सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।कथावाचक ने कहा कि भगवान शिव की अनुमति लिए बिना उमा अपने पिता दक्ष के यहां आयोजित यज्ञ में पहुंच गई यज्ञ में भगवान शिव को निमंत्रण नहीं दिए जाने से कुपित होकर सती ने यज्ञ कुंड में आहुति देकर शरीर त्याग दिया।इससे नाराज शिव के गणों ने राजा दक्ष का यज्ञ विध्वंस कर दिया। कथा व्यास ने कहा कि जहां सम्मान न मिले वहां कदापि नहीं जाना चाहिए।
ध्रुव का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि सौतेली मां से अपमानित होकर बालक ध्रुव कठोर तपस्या के लिए जंगल को चल पड़े।बारिश, आंधी-तूफान के बावजूद तपस्या से न डिगने पर भगवान प्रगट हुए और उन्हें अटल पदवी प्रदान की। कथा के अंत में प्रेम मूर्ति संत मुक्तामणि शास्त्री जी द्वारा आये हुए विशिष्ट अतिथियों का फूल माला पहनाकर आशिर्वाद दिया गया।कथा में यजमान सुरेश चंद्र त्रिपाठी व विद्या देवी ,समाजवादी नेता विक्की मिश्रा, हेमन्त पांडे ,ज्ञान प्रकाश पाण्डेय,आनंदमणि त्रिपाठी,रवि शंकर त्रिपाठी,आनंद शंकर त्रिपाठी,संजय यादव, राजीव कसेरा,देव गुप्ता,सुनील त्रिपाठी, जलज द्विवेदी,अरूण पाण्डेय ,देवमणि त्रिपाठी सहित भक्तगण मौजूद रहे।
