जिलाधिकारी की अध्यक्षता में अभियोजन कार्यों की मासिक समीक्षा बैठक सम्पन्न, दोषियों को सजा दिलाने का सख्त निर्देश, लोक अदालत 21 मई को
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जिलाधिकारी की अध्यक्षता में अभियोजन कार्यों की मासिक समीक्षा बैठक सम्पन्न, दोषियों को सजा दिलाने का सख्त निर्देश, लोक अदालत 21 मई को
गोंडा (युगनव टाइम्स लाइव ) डी एम डॉ0 उज्ज्वल कुमार की अध्यक्षता में अभियोजन कार्यों की मासिक समीक्षा बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में सम्पन्न हुई। समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि गम्भीर प्राकृति के वादों में प्रभावी पैरवी कर अधिक से अधिक दोषियों को सजा दिलायी जाय। जिससे अपराधी किस्म के लोगों को यह मैसेज जाये कि छोटा से छोटा अपराध करने पर भी वे सजा से बच नहीं सकते हैं। डीएम ने यह भी निर्देश दिया कि न्यायालय में साक्ष्य के लिए आने वाले गवाहों से शतप्रतिशत परिक्षित कराया जाय तथा दोषमुक्त मामलों में नियमानुसार अपील की कार्यवाही भी सुनिश्चित की जाय। समीक्षा बैठक के दौरान में ई-प्रासी क्यूशन डाटा फिडिंग, सम्मन तामिला इत्यादि कार्यों की भी समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गए।
जिलाधिकारी ने मौजूद सभी संबंधित शासकीय अधिवक्ताओं एवं अभियोजन के अधिकारियों से न्यायालयों में साक्षियों की उपस्थिति और उनके पक्षद्रोही होने के कारणों की समीक्षा की।
डीएम ने पुलिस विभाग व अभियोजन विभाग से कहा कि समन तामीली समयबद्ध होनी चाहिए। अधिकतम साक्षियों को न्यायालयों के समक्ष परीक्षित कराया जाय। अकारण साक्षियों की वापसी ना होने पाए, यह प्रत्येक दशा में सुनिश्चित किया जाए। न्यायालयों में विचाराधीन मामलों में सफल अभियोजन पैरवी कर सजा का प्रतिशत बढ़ाया जाना चाहिए। ताकि न्यायालयों में लंबित पुराने मामलों का निस्तारण शीघ्र हो सके।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी सुरेश कुमार सोनी, अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज, अभियोजन अधिकारी, एसीएमओ, जिला पूर्ति विभाग, एसडीओ वन विभाग, ड्रग इंस्पेक्टर राजिया बानो, ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी, संबंधित अधिवक्तागण सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय लोक अदालत, 21 मई को
उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार एवं माननीय जनपद न्यायाधीश श्री ब्रजेन्द्र मणि त्रिपाठी के आदेशानुसार दिनांक-21.05.2023 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन जनपद-न्यायालय गोण्डा एवं समस्त तहसील स्तर पर किया जायेगा, जिसमें यातायात, लघु आपराधिक प्रकरण, नगर पालिका आदि से सम्बन्धित मामलों एवं बैंक मामले, धारा 138 पराक्रम लिखत अधिनियम वाद आदि (लम्बित एवं प्री-लिटिगेशन मामले) के साथ-साथ आवश्यकतानुरूप सभी सुलह योग्य आपराधिक वादांे, सिविल वादों, भूमि अधिग्रहण वादो, मोटर दुर्घटना प्रतिकर मामले, पारिवारिक वादों, स्टाम्प वादांे, उपभोक्ता फोरम वादों, श्रम मामलों, मध्यस्थम प्रकरणों, नगरपालिका/नगर निगम टैक्स वसूली मामलों आदि को पक्षकारों की सहमति से लिया जा सकता है। इसके अतिरिक्त विद्युत अधिनियम के अन्तर्गत सुलह योग्य वाद, धारा 446 द0प्र0स0 सम्बन्धी मामले, पब्लिक प्रिमिसेज एक्ट सम्बन्धी मामले उत्तराधिकार सम्बन्धी मामले, आयुध अधिनियम के उपयुक्त प्रकरण, बीमा सम्बन्धी वाद, स्थानीय विधियों के अन्तर्गत शमनीय वाद, सेवा/वेतन संबंधी वाद, सेवानिवृत्ति परिलाभों से सम्बन्धित प्रकरण, किरायेदारी वाद, वन अधिनियम के अन्तर्गत प्रकरण, पुलिस अधिनियम के अन्तर्गत चालान, मोटरयान अधिनियम के अन्तर्गत चालान, ई-चालान, आर्बिटेªशन के निष्पादन वाद, उत्तर प्रदेश एवं वाणिज्य अधिनियम के अन्तर्गत चालान, चलचित्र अधिनियम के अन्तर्गत, आबकारी अधिनियम सम्बन्धी वाद, गैम्बलिंग एक्ट के अन्तर्गत चालान, नगर निगम/नगर पालिका के अन्तर्गत चालान विकास प्राधिकरण के अन्तर्गत चालान मेड़बन्दी एवं दाखिल खारिज वाद, मोबाइल फोन एवं केबल नेटवर्क सम्बन्धी प्रकरण, प्री-लिटिगेशन प्रकरण, मनरेगा प्रकरण, शिक्षा का अधिकार सम्बन्धी प्रकरण, राशन कार्ड/बी0पी0एल0कार्ड/जाति एवं आय प्रमाण पत्र से सम्बन्धित प्रकरण, एवं अन्य प्रकार के वादों/प्रकरणों का निस्तारण सुलह समझौते के आधार पर तथा अर्थदण्ड अधिरोपित करके किया जायेगा। समस्त वादकारियों से अपील है कि दिनांक-21.05.2023 को सम्बन्धित न्यायालय/ ट्रिब्यूनल में पंहुचकर राष्ट्रीय लोक अदालत में अपने वादों का निस्तारण कराकर उक्त राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने में सहयोग करें। इससे सबसे अधिक न्यायिक प्रक्रिया पूरी हो सके।
