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राजनीति के महापंडित व महायोद्धा : कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह

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राजनीति के महापंडित व महायोद्धा : कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह

जटाशंकर सिंह
नवाबगंज : अवध की रामनगरी के  करीब 15 किलोमीटर दूर विश्नोहरपुर गांव मे चमकती सफेद हवेली कैसरगंज सांसद व भारतीय कुश्ती महासंघ के निवर्तमान अध्यक्ष व भाजपा के बाहुबली सांसद बृजभूषण शरण सिंह की है। दो मंज़िला विशाल हवेली में साफ़-सुथरे लॉन हैं और चमकती गाड़ियां खड़ी रहती हैं। घोड़ों के साथ ही निजी हेलीकॉप्टर उनकी हवेली की सुंदरता में चार चांद लगाते हैं। सरयू नदी के पार नवाबगंज कस्बे में स्थित इसी घर से छह बार के सांसद बृजभूषण शरण सिंह, करीब तीन दशक से अपनी राजनीति चलाते आ रहे हैं। उनके काफी समर्थक हैं, जिनकी संख्या लाखों में बताई जा रही है। राम मंदिर के साथ उनके जुड़ाव ने लोगों के बीच बृजभूषण शरण सिंह की लोकप्रियता को भी बढ़ाने का काम किया है, लेकिन उनके राजनीतिक भविष्य के बारे में फिलहाल अनुमान लगाना मुश्किल है।
आठ जनवरी, 1957 को उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले के नवाबगंज क्षेत्र के विश्नोहरपुर गांव में जन्मे, बृजभूषण शरण सिंह किशोरावस्था में ही अखाड़े में शामिल हो गए थे और स्थानीय स्तर पर अच्छी कुश्ती लड़ने वालों में जाने जाते थे। राजनीति में उनका करियर अयोध्या के साकेत कॉलेज में छात्र जीवन के दौरान शुरू हुआ। इस दशक में अयोध्या शहर उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा था, तब राम मंदिर आंदोलन ने धीरे-धीरे आकार भाग लिया, जिससे शक्ति का भंवर बना और इस भंवर में बृजभूषण शरण सिंह जैसे युवाओं ने खुद को राजनेताओं की तरह पेश किया, जिसमें वह कामयाब भी हुए। साल 1991 में राम मंदिर आंदोलन जब अपने उफान पर था। बृजभूषण शरण सिंह ने अपना पहला लोकसभा चुनाव बीजेपी के टिकट पर लड़ा और कांग्रेस के राजा आनंद सिंह को करीब एक लाख मतों से हराया। तब बीजेपी ने पहली बार उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार बनाई थी। अगले ही साल बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया, जिसके बाद उत्तर प्रदेश की कल्याण सिंह सरकार को बर्खास्त कर दिया गया। बृजभूषण शरण सिंह ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि उन्होंने बाबरी मस्जिद को गिराने में मदद की। उन्होंने दावा किया कि वे उस इलाके से पहले व्यक्ति थे जिन्हें आंदोलन के समय मुलायम सिंह यादव सरकार ने गिरफ्तार किया और बाबरी विध्वंस के बाद सीबीआई ने। बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ बृजभूषण शरण सिंह को भी सीबीआई ने अभियुक्त बनाया। परन्तु 2020 में उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया। 1990 के दशक में उन्हें अक्सर संतों और राम मंदिर आंदोलन के नेताओं के साथ देखा जाता था, जिसके चलते उन्होंने खुद को एक तेज तर्रार हिंदू नेता के रूप में पेश किया। वर्ष 1992 में उन पर गैंगस्टर लगा।दाऊद इब्राहिम के सहयोगियों की कथित रूप से मदद करने के आरोप में आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी टाडा लगाया गया। इस मामले में उन्हें कई महीने दिल्ली की तिहाड़ जेल में रहना पड़ा। यह साल 1999 का समय था। इतना सब कुछ हो रहा था, लेकिन उनके प्रभाव में कोई कमी नहीं आ रही थी। अगले 15 सालों के दौरान बृजभूषण शरण सिंह ने राजनीति के मैदान में खुद को ऐसे स्थापित कर लिया, जिसे हराया न जा सके। वे कभी-कभी राज्य सरकार के फैसलों को सीधी चुनौती देते थे। गोण्डा जिले के स्थानीय लोगों को अभी भी याद है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने गोण्डा का नाम बदलकर लोकनायक जयप्रकाश नारायण नगर करने की कोशिश की थी, तब बृजभूषण शरण सिंह ने उनकी इस कोशिश का कड़ा विरोध किया था और उन्होंने मायावती को चुनौती देते हुए पदयात्रा भी निकाली थी। यहां तक की अटल बिहारी वाजपेयी को भी इस मुद्दे में हस्तक्षेप करना पड़ा था और उन्होंने मायावती को अपना फैसला वापस लेने के लिए कहा था। बृजभूषण शरण सिंह ने 2009 के आम चुनावों से पहले बीजेपी को छोड़कर समाजवादी पार्टी का रूख किया और अपनी सीट पर जीत दर्ज की, लेकिन 2014 के चुनावों से पहले वे फिर से बीजेपी में लौट आए। गोण्डा के नंदिनी नगर में वे कुश्ती का जो भी कार्यक्रम आयोजित करते हैं तो वह एक राजनीतिक घटना बन जाता है। कुश्ती के इन कार्यक्रमों में बृजभूषण शरण सिंह एसयूवी गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचते हैं, जहां ‘नेता जी’ जिंदाबाद के नारों के बीच उन्हें मंच पर लगी ऊंची कुर्सी पर बिठाया जाता है। बृजभूषण शरण सिंह कुश्ती के अखाड़े में कभी-कभी रेफरी के पीछे तक चले जाते हैं। पहलवानों को कभी डांटते हैं तो कभी उन्हें सलाह देते हुए नजर आते हैं। जानकारों के मुताबिक़ इस तरह के कार्यक्रम उन्हें लोगों से मिलने का मौक़ा देते हैं जिससे उनकी राजनीतिक शक्ति में काफी इजाफा होता है। इन कार्यक्रमों में न सिर्फ स्थानीय लोग, बल्कि विधायक, पंचायत प्रमुख और इलाके के प्रभावशाली लोग हिस्सा लेते हैं। बृजभूषण शरण सिंह ने साल 2022 में एक न्यूज वेबसाइट को इंटरव्यू देते हुए माना था कि उन्होंने एक व्यक्ति की हत्या की थी। 2019 में उनके चुनावी हलफनामे में चार मामले लंबित हैं, जिसमें हत्या का प्रयास जैसा मामला भी शामिल है। फिलहाल वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम में राजनीतिक पंडित बने बृजभूषण शरण सिंह पर क्या प्रभाव पड़ेगा यह तो गर्त में है।

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