गोंडा : नवाबगंज मे बीमारियां बांट रहीं तम्बाकू की कार्यशालाएं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड चुप
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गोंडा : नवाबगंज मे बीमारियां बांट रहीं तम्बाकू की कार्यशालाएं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड चुप
गोंडा ( युगनव टाइम्स लाइव ) कस्बा नवाबगंज व वजीरगंज तम्बाकू के हब में इससे अछूता कोई नहीं। आप किसी न किसी रुप में तम्बाकू का सेवन करें या न करें, प्रभावित होना पड़ेगा। कारण कि तम्बाकू उत्पादन का गढ़ कहा जाने वाला नवाबगंज और वजीरगंज में सैकड़ों की तादाद में सड़कों के किनारे फैली कार्यशालाओं में उड़ रही गर्द, बीमारियां बांट रहीं हैं ।
इस समय उमस भरी गर्मी तेज लूं के थपेड़ो के साथ तम्बाकू की गर्द आम जनमानस के स्वास्थ्य में जहर घोल रहा है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की इस समस्या की ओर से आंखें मूंदे हुए हैं। और कार्यशालाओं में प्रतिदिन लाखों रुपयों की तम्बाकू का वारा-न्यारा होता है। जिसका लाभ तम्बाकू के व्यापारी को मिलता है। लेकिन नुकसान राहगीरों को सहना पड़ता है। पूरे देश और दुनिया में चिंता तम्बाकू जनित रोगों से ग्रस्त लोगों की संख्या में लगातार हो रहे इजाफे पर व्यक्त की जा रही है। वजीरगंज और नवाबगंज क्षेत्र का बड़ा हिस्सा बैठे-बिठाए रोगी होते चला जा रहा है। इसका सबसे अधिक शिकार तंबोर तंबाकू का कार्य करने वाले मजदूर व बच्चे हो रहे हैं
चंदीपुर बौरिंहा उप स्वास्थ्य केन्द्र पर तैनात प्रभारी चिकित्साधिकारी डाक्टर ओमप्रकाश भारती का कहना है कि यहां आने वाले मरीजों में से 40 से 80 फीसदी लोग तम्बाकू जनित रोगों की चपेट में आ चुके हैं, या आ रहे लोगों की होती है। इनमें पुरुषों के साथ महिलाएं और बच्चे भी ब्रांकाइटिस, अस्थमा आदि गंभीर बीमारियों के शिकार हैं। देश में तम्बाकू की बड़ी मंडियों में शुमार नवाबगंज और वजीरगंज मंडी में प्रतिवर्ष एक लाख कुंतल से अधिक तंबाकू का उत्पादन होता है। इसकी प्रोसेसिंग की लंबी प्रक्रिया में मानव श्रम का बखूबी उपयोग होता है। और अन्य कार्यों की तुलना में इसमें मेहनताना भी अधिक है। इसलिए घर का पूरा का पूरा परिवार इसमें लगा रहता है। अब यह काम जानलेवा साबित हो रहा है। और बीमारियों की संख्या में दिन-प्रतिदिन इजाफा हो रहा है।
ये है तम्बाकू जनित रोगों
अस्थमा, ब्रांकाइटिस, ट्यूवर कुलोसिस, कैंसर, इन्टेसटाइनल इनफैक्शन, गुर्दे में संक्रमण, ईएनटी इनफैक्शन, सीओपीडी, फाइब्रोसिस, चर्मरोग, हाइड्रो फ्रोवासिस, हाइपर सेंसिविटी, न्यूमोनाइटिस आदि
बचने के उपाय
प्रोसेसिंग कार्यशाला के आसपास बच्चों को न रहने दें।
कार्य के दौरान आंखों में चश्मा लगाएं।
मुंह, नाक और कान को ढकें रखें।
तम्बाकू निर्माण के कारखाने घनी आबादियों से दूर निर्जन स्थानों पर लगाएं।
गर्मियों में कार्यशाला के आसपास चारों ओर पानी का छिड़काव कराएं जिससे गर्द न उड़े। तथा प्रदूषण बोर्ड को चाहिए प्रदूषण से बचाव के उपाय अपनाने के लिए लोगों को जागरूक करें।
