नमस्कार,युगनव टाइम्स लाइव में आपका हार्दिक अभिनंदन हैं, यहां आपकों 24×7 के तर्ज पर पल-पल की अपडेट खबरों की जानकारी से रूबरू कराया जाएगा,खबर और विज्ञापन के लिए संपर्क करें- +91 9956313999,हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें साथ ही फेसबुक पेज को लाइक अवश्य करें।धन्यवाद
October 3, 2026

Yugnav Times live

Hindi News, Breaking News in Hindi, हिंदी न्यूज़ , Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi,Yugnav Times

थानों के कुर्सियों पर घंटो चिपके बैठे रहते हैं कुछ पत्रकार,पीड़ित अपनी समस्या नहीं सुना पाता है जिम्मेदार को

1 min read

[responsivevoice_button voice=”Hindi Female”]


 775 views

राम कुमार मिश्रा
झिलाही बाजार( गोंडा) युगनव टाइम्स लाइव / कुछ पत्रकारों की सुबह की चाय थाने से शुरुआत होती है घंटों थाने के कुर्सी से चिपके रहते हैं, फरियादी अपनी समस्या लेकर आते हैं लेकिन इनकी वजह से अधिकारियों को अपनी समस्याएं नहीं बता पाते हैं।
इन पत्रकारों का बस इतना काम है कि थाने पर पहुंचे चाय पियो और पूछे साहब कितने मुकदमे लिखे गए हैं। उन्हें यह नहीं पूछना है कि आखिर कौन पीड़ित है और किस से पीड़ित है क्या उसे न्याय मिलेगा या नहीं इन्हें तो सिर्फ चाय से मतलब है और अगर कोई पीड़ित मिल गया तो उससे उसके काम करवाने के एवज में…. ट्राई किया जाता है आज के कुछ वर्ष पहले यही पत्रकारिता लोगों के दिलों में बैठती थी कि पत्रकार लोग हमारी समस्याओं को अधिकारियों तक पहुंचाएंगे और हमें न्याय मिलेगा लेकिन ऐसा अब नहीं हो रहा है ज्यादातर लोग थानों पर बैठकर पत्रकारिता की आड़ में पहली चाय की शुरुआत थानों से ही करते हैं इसीलिए जो वास्तव में असली पत्रकारिता करते हैं वह भी बदनाम है कहावत है हम तो डूबे हैं सनम तुमको भी ले डूबेंगे देखा जाए तो पूरे जिले में कोई ऐसा था ना नहीं होगा जहां पर ऐसे पत्रकार ना हो और आने पर ना जाते हो हर जगह सुबह उठकर थाने पर पहुंचकर ड्यूटी लगा देते हैं और वही उनकी पहली चाय की शुरुआत होती है। लोगों ने दबी जुबान में कहा कि आज पत्रकारिता को सभी लोग ताक पर रख दिए हैं
इसीलिए पत्रकारिता के विश्वानीता बदनाम होती जा रही है लोग कहते हैं कि अब नाम के पत्रकार रह गए हैं जो असल में पत्रकार हैं। वह भी ही बदनाम हो रहे हैं इन पत्रकारों की वजह से कुछ अखबारों के संपादक बिना सोचे समझे ऐसे लोगों को पत्रकार बना देते हैं जिनकी सुबह की चाय की शुरुआत सिर्फ थानों से होती है।
नाम न छापने की बात पर एक पुलिस अधिकारी ने भी कुछ ऐसा ही अपना दर्द भी बयां किया।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »
error: Content is protected !!