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October 3, 2026

Yugnav Times live

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सुमित बनाम कुमति… लेखक शैलेंद्र सिंह

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कृष्ण कुमार मिश्रा
बलरामपुर ( युगनव टाइम्स लाइव ) सनातन संस्कृति को अक्रांताओं से बचाने का कार्य बाबा गोस्वामी जी का अभिन्न योगदान है,
लेकिन आज के राजनीति में कुछ नेता बाबा गोस्वामी जी पर ही विशेष टिप्पणी(जातिवाद) होने का आरोप लगा रहे और विवाद को रामचरितमानस से जोड़ रहे हैं कुछ दिन पूर्व बिहार के शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर जी ने रामचरित्र मानस को लेकर विवाद उत्पन्न कर दिया।
उत्तर प्रदेश के सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य जी ने उनके स्वर में स्वर जोड़कर बोल दिया की राम चरित्र मानस में केवल सवर्ण जाति का सम्मान है बाकी जातियों को निम्न दिखाया गया है यह उनका कहना है लेकिन मेरा मानना है ऐसा कुछ नहीं है क्योंकि आधी अधूरी जानकारी सदैव घातक होती है
गोस्वामी जी रामचरितमानस लिखने से पहले ही कहते हैं “स्वांत: सुखाय तुलसी रघुनाथ गाथा” अर्थात स्वयं के सुखी के लिए गोस्वामी तुलसीदास जी रघुनाथ जी की गाथा गा रहे हैं आगे दूसरी चौपाई में लिखते हैं “कहीं कथा भई संगत जैसे” अर्थात जैसी संगत होती है कथा उसी प्रकार आगे बढ़ती रहती है अब सनातन विरोधी नेता उसी संगति वाली कथा पर अर्थ जानकारी प्रदान कर समाज को बांटने का कर कर रहे हैं कथा में एक जगह बाबा गोस्वामी जी लिखते हैं “बड़े भाग्य मानुष तनु पावा, सुर दुर्लभ सब ग्रथन्हि गावा।।” अर्थात यह शरीर बड़े भाग्य से मिला है चारों वेद छह शास्त्र अट्ठारह पुराण यही गाते हैं
आगे दूसरी चौपाई में बाबा लिखते हैं इसी शरीर के विषय में -“क्षिति जल पावक गगन समीरा पंच रचित अति अधम सरीरा”।।
अर्थात यह शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना है और यह शरीर अधम पापी है अब बाबा की कौन सी बात मानोगे कोई आपके पास आएगा और बताएगा कि यह शरीर अधम है और कोई आपसे कहेगा कि यह शरीर बड़े भाग्य से मिला है विचार आपको करना कि क्या सही है।
एक दोहा जिस पर हाहाकार मचाते हैं की “ढोल गवार शुद्र पशु नारी सकल ताड़ना के अधिकारी”।। इसका अर्थ निकाल कर केवल समाज का अनर्थ ही करेंगे इस चौपाई का अर्थ समझने के लिए आपको आगे पीछे की चौपाई का अर्थ समझना पड़ेगा यहां समुंद्र अपनी गलती को छुपा कर भगवान से माफी मांग रहा है और अपनी गलती को स्वीकार कर रहा है लेकिन दंड न मिले इसलिए वह ताड़ना शब्द का प्रयोग कर रहा है और मैं अवध का रहने वाला हूं हमारे यहां ताड़ना का मतलब देखना से होता है यह अवध के सभी लोग जानते हैं की ताड़ना का मतलब देखना होता है दंड देना नहीं होता है।
एक एक दोहे पर विवाद और करते हैं- “नारि मुई ग्रह संपत्ति नासी, मुड़ मुड़ाय भये सन्यासी।”
अर्थात जो वर्ण में नीचे हैं जैसे कुम्हार भील कॉल आदि जातियों की स्त्री मर जाने पर अथवा घर की संपत्ति नाश हो जाने पर सिर मुड़ा कर सन्यासी हो जाते हैं यह कथा में उस समय की घटना का वर्णन है जब काग भुसुंडि जी गरुड़ जी को कलयुग की महिमा बताते हैं की कलयुग में ज्यादातर सन्यासी कौन बनता है इसलिए मैं आप सभी से अनुरोध करता हूं किसी नेता के बहकावे में मत पड़े कथा के अनुसार चलें क्योंकि कथा में संगति के अनुसार ही दोहा चौपाई लिखा गया है यह अपने विवेक पर निर्भर करता है की हमको समझना क्या है बाबा गोस्वामी जी आगे लिखते हैं की “सुमति कुमति सबके उर रहही, नाथ कुरान निगम अस कहही”।।
अर्थात सद्बुद्धि (अच्छी बुद्धि) और कुबुद्धि (खोटी बुद्धि) सबके हृदय में रहती है जहां सद्बुद्धि है वहां नाना प्रकार की संपदा रहती है जहां कुबुद्धि है वहां परिणाम विपरीत अर्थात दुख भरा रहता है।।
इसलिए मेरा जनमानस से निवेदन है कि सदैव सुबुद्धि का प्रयोग करके सुख के अधिकारी बने और किसी प्रकार या किसी के बहकावे में कुबुद्धि कोना जागृत होने दें।
इस छोटे से प्रयास से मैंने आप सबको समझाने का प्रयास किया है बाकी आप सब स्वतंत्र हैं।
लेखक- शैलेंद्र सिंह
जिला कार्यालय मंत्री
भाजपा बलरामपुर

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