हजरत अली के घर में सब ने रोजा रखा हजरत फातमा ने भी रोजा रखा
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मोहम्मद सुलेमान /राकेश कुमार सिंह
गोंडा ( युगनव टाइम्स लाइव ) हज़रत अली के घर में सबने रोज़ा रखा ! हज़रत फ़ातिमा ने भी रोज़ा रखा,दो बच्चे है उनके अभी छोटे है पर रोज़ा रखा हुआ है।
मग़रिब का वक़्त होने वाला है, इफ्तारी का वक़्त होने वाला है,सबके सब मुसल्ला बिछा कर रो-रोकर दुआ मांगते हैं
#हज़रत_फ़ातिमा दुआ ख़त्म कर के घर में गयी और चार(4)रोटी बनाई,इससे ज़्यादा उनके घर में अनाज नहीं है।हज़रत फ़ातिमाचार रोटी लाती है।पहली रोटी अपने शौहर अली के सामने रख दी, दूसरी रोटी अपनी बड़े बेटे हसन के सामने, तीसरी रोटी अपनी छोटे बेटे हुसैन के सामने रख दी, और एक रोटी खुद रख ली।
मस्जिद-ऐ-नबवी में अज़ान हो गयी, सबने रोज़ा खोला,सबने रोटी खाई मगर दोस्तों अल्लाह-की-कसम वो फ़ातिमा थी जिसने आधी रोटी खाईऔर आधी रोटी को दुपट्टे में बांधना शुरू कर दिया
ये मामला हज़रत अली ने देखा और कहा के फ़ातिमा तुझे भूख नहीं लगी, एक ही तो रोटी है उसमे से आधी रोटी दुपट्टे में बांध रही हो??
फ़ातिमा ने कहा ! ! ऐ अली हो सकता है मेरे बाबा जान(नबी पाक ﷺ) को इफ्तारी में कुछ न मिला हो, वो बेटी कैसे खायेगी जिसके बाप ने कुछ नहीं खाया होगा?
फ़ातिमा दुपट्टे में रोटी बांध कर चल पड़ी है उधर हमारे नबी( ﷺ )मग़रिब की नमाज़ पढ़ कर आरहे हैं , हज़रत फ़ातिमा दरवाजे पर है देख कर हुज़ूर(ﷺ)कहते हैं, ऐ फ़ातिमा तुम दरवाजे पर कैसे, फ़ातिमा ने कहा ऐ अल्लाह के रसूल(ﷺ)मुझे अंदर तो लेके चले।
हज़रत फ़ातिमा के आँखों में आंसू थे, कहा जब इफ्तार की रोटी खाई तो आपकी याद आगयी कि शायद आपने खाया नहीं होगा इसलिए आधी रोटी दुपट्टे से बांध कर लायी हूँ।
रोटी देख कर हमारे नबी(ﷺ)की आँखों में आंसू आ गए और कहा ऐ फ़ातिमा अच्छा किया जो रोटी ले आयी, वरना चौथी रात भी तेरे बाबा की इसी हालात में निकल जाती। दोनों एक दूसरे को देख कर रोने लगते हैं।
अल्लाह के रसूल(ﷺ) ने रोटी मांगी, फ़ातिमा ने कहा बाबा जान आज अपने हाथों से रोटी खिलाऊंगी और चौड़े चौड़े टुकड़े किये और हुज़ूर(ﷺ)को खिलाने लगी।
रोटी ख़त्म हो गई और हज़रत फ़ातिमा रोने लगती है, हुज़ूर पाक ने देखा कहा के फ़ातिमा अब क्यों रोती हो??
कहा अब्बा जान कल किया होगा ?? कल कोन खिलाने आयेगा ? कल किया मेरे घर में चूल्हा जलेगा ?? कल किया आपके घर में चूल्हा जलेगा ??
नबी( ﷺ) अपने प्यारा हाथ फ़ातिमा के सर पर रखा और कहा कि फ़ातिमा तू भी सब्र करले और मैं भी सब्र करता हूँ। हमारे सब्र से अल्लाह उम्मत के गुनहगारो के गुनाह माफ़ करेगा।
अल्लाह हु अकबर
ये होती है मुहब्बत जो नबी(ﷺ) को हमसे थी, उम्मत से थी । ये गुनाहगार उम्मती हम ही है , जिनके लिए हमारे नबी(ﷺ) भूखे रहे, नबी की बेटी भूखी रही।
और आज हमलोग क्या कर रहे हैं उनके लिए कल क़यामत के दिन मैं और आप क्या जवाब देंगे।
