रमजान रहमत, बरकत, और मगफिरत का महीना है
1 min read
46,855 views
रमजान रहमत, बरकत, और मगफिरत का महीना है
गौरा चौकी गोंडा।रमज़ान इस्लामी वर्ष का सबसे पवित्र और बरकत वाला महीना है। इसी महीने में कुरआन नाज़िल हुआ, जिसने मानवता को हिदायत का रास्ता दिखाया। रमज़ान बंदे और अल्लाह के रिश्ते को मज़बूत करता है। रमज़ान रहमत से शुरू होता है। इस महीने में नेक कामों का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। रोज़ा इंसान को सब्र करना और दूसरों के दर्द को समझना सिखाता है। भूख और प्यास के ज़रिए इंसान गरीबों और ज़रूरतमंदों की हालत समझता है, जिससे समाज में हमदर्दी और प्यार पैदा होता है। यह रहमत की बात है कि इस मुबारक महीने में एक स्वैच्छिक इबादत फर्ज़ इबादत के बराबर है और एक फर्ज़ इबादत 70 फर्ज इबादतों के बराबर है। रमज़ान का अंतिम भाग क्षमा का समय है। अल्लाह सर्वशक्तिमान अपने बंदों के गुनाहों को क्षमा करने के लिए बहाने ढूंढते हैं। जो कोई सच्चे मन से रोज़ा रखता है, अपने रब से माफ़ी मांगता है और पश्चाताप करता है, उसके पिछले गुनाह माफ़ हो जाते हैं। रमज़ान हमें केवल भूख और प्यास से मुक्ति का संदेश ही नहीं देता, बल्कि यह हमें अपने नैतिक मूल्यों को सुधारने, अपनी ज़बान पर लगाम लगाने, झूठ और बुराई से बचने और अच्छे कर्मों में आगे बढ़ने की शिक्षा भी देता है। इसका वास्तविक उद्देश्य यह है कि रमज़ान के बाद भी व्यक्ति का जीवन अच्छाई, धर्मपरायणता और अल्लाह की आज्ञाकारिता के मार्ग पर बने रहे।
