यूजीसी बिल पर केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में करे मजबूत पैरवी: पूर्व विधायक बृजेश प्रजापति
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संजय प्रजापति गोण्डा। राष्ट्रीय प्रजापति महासभा गोण्डा द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे पूर्व विधायक बृजेश प्रजापति ने यूजीसी बिल को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि समाज में इस बिल को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ रही है, जिसका सीधा असर आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों पर पड़ना निश्चित है। सभा को संबोधित करते हुए बृजेश प्रजापति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि वे अपना दिल बड़ा करें और इस मामले में सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित कराएं। उन्होंने जोर देकर कहा, “यदि न्यायालय में सरकार की ओर से मजबूत वकील खड़े नहीं किए जाते हैं, तो यह बात सिद्ध हो जाएगी कि भाजपा सरकार वास्तव में इस बिल को लागू नहीं करना चाहती थी”। पूर्व विधायक ने चेतावनी देते हुए कहा कि आम चर्चाओं में यह बात घर कर चुकी है कि सरकार की मंशा इस बिल को लेकर साफ नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सर्वोपरि है और 2027 के चुनावी रण में जाने से जनता के बीच बढ़ता अविश्वास पहले सरकार को इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। सभा को सम्बोधित करते हुए मनोज मानव ने कहा कि संतराम बी ए के १३९ वे जन्म दिवस पर आयोजित कार्यक्रम मे कहा कि संतराम बीए ने जात-पांत तोड़क मंडल’ की स्थापना 1922 में उन्होंने लाहौर में ‘जात-पांत तोड़क मंडल’ की स्थापना की। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज में व्याप्त ऊंच-नीच के भेदभाव को जड़ से मिटाना था। वे मानते थे कि केवल सुधार से काम नहीं चलेगा, बल्कि जाति के विचार को ही नष्ट करना होगा। 1922 में उन्होंने लाहौर में ‘जात-पांत तोड़क मंडल’ की स्थापना की। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज में व्याप्त ऊंच-नीच के भेदभाव को जड़ से मिटाना था। वे मानते थे कि केवल सुधार से काम नहीं चलेगा, बल्कि जाति के विचार को ही नष्ट करना होगा। ए के नंद ने कहा कि संत राम बी.ए. का दृढ़ विश्वास था कि जब तक विभिन्न जातियों के बीच रोटी और बेटी का संबंध (खान-पान और विवाह) नहीं होगा, तब तक जातिवाद खत्म नहीं हो सकता। उन्होंने हजारों अंतर-जातीय विवाह कराए और स्वयं भी इसके उदाहरण बने।

महासभा के प्रदेश महासचिव शिव कुमार प्रजापति कहा कि 1936 में जात-पांत तोड़क मंडल के वार्षिक अधिवेशन के लिए उन्होंने डॉ. बी.आर. अंबेडकर को अध्यक्ष के रूप में आमंत्रित किया था। हालांकि, डॉ. अंबेडकर का भाषण इतना क्रांतिकारी था कि मंडल के कुछ नरमपंथी सदस्यों ने उसे स्वीकार नहीं किया। इस घटना ने समाज सुधार की बहस को एक नई ऊंचाई दी। एड्वोकेट रामफेर प्रजापति के कहा कि संत राम बी.ए. एक कुशल लेखक और संपादक थे। उन्होंने ‘क्रांति’ नामक पत्रिका निकाली और कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं। उनकी आत्मकथा ‘मेरे जीवन के अनुभव’ दलित और पिछड़े समाज की पीड़ा और संघर्ष का सजीव चित्रण करती है। कर्यक्रम को प्रदेश सचिव एडवोकेट संजय प्रजापति विजय प्रजापति सतनाम प्रजापति सहित दर्जनो प्रजापति भाई ने सम्बोधित किया मण्डल सयोजक घनश्याम प्रजापति ने संचालन किया कार्यक्रम के आयोजन राष्ट्रीय प्रजापति महासभा के जिला अध्यक्ष शिव कुमार प्रजापति उर्फ पप्पू प्रजापति ने कार्यक्रम में आए सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया । कार्यक्रम में अम्बुज प्रजापति बार एसोशियेशन के सदस्य एडवोकेट गिरधारी प्रजापति कन्हैया लाल नवीन प्रजापति रंजीत प्रजापति सहित सैकडो लोग उपस्थित रहे ।
