“डिग्री फार्मा की, काम डॉक्टर का और बहाना थाने का… वाह रे सिस्टम
1 min read
69,697 views
तरबगंज गोण्डा किसी अवैध काम को बंद कराना आसान है, तो गोंडा के इस ‘कागजी दंगल’ को देखिए। यहाँ शिकायत कर्ता यूथ फार्मासिस्ट के देवीपाटन मंडल उपाध्यक्ष सुधांशु मिश्रा की शिकायत पर एक क्लीनिक की जांच की गई थी जिस पर अधीक्षक तरबगंज द्वारा एक टीम बनाकर जांच किया गया जांच रिपोर्ट में भी उक्त क्लिनिक को अवैध बताया गया था जिसके लिए अवैध क्लीनिक को सील करने के आदेश ऐसे घूम रहे हैं जैसे शादी का कार्ड, जिसे हर कोई बस आगे बढ़ा देना चाहता है। सबसे पहले मुख्य चिकित्सा अधिकारी गोण्डा साहब ने भारी-भरकम पत्र (संख्या 15372) जारी किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि नबी मोहम्मद पुत्र शाह मोहम्मद , जिनके पास केवल ‘डी.फार्मा’ की डिग्री है, वे डॉक्टर बनकर क्लीनिक चला रहे हैं।महोदय का आदेश आया “जाओ, क्लीनिक सील करो और FIR दर्ज कराओ!
सरहद का सस्पेंस: ‘तेरा थाना या मेरा थाना?’
जब अधीक्षक महोदय तरबगंज कमर कसकर कार्रवाई करने निकले, तो उन्हें पता चला कि असली बाधा क्लीनिक नहीं, बल्कि ‘थाने की सीमा’ है।
तरबगंज पुलिस का जवाब: अधीक्षक महोदय ने पत्र भेज कर कहा कि “साहब, ये इलाका तो हमारे नक्शे में ही नहीं है। ये तो वजीरगंज थाने का मामला है।”अधीक्षक महोदय ने वापस CMO साहब को चिट्ठी लिख दी— “हुजूर, हम तो गए थे, लेकिन पुलिस कह रही है कि ये हमारा इलाका नहीं है। अब आप ही कुछ करिए!”
*डिग्री’ का नया आविष्कार*
पत्र में जिक्र है कि आरोपी D.Pharma की आड़ में डॉक्टरी कर रहा है। यानी, दवाई बेचने का लाइसेंस लेकर सर्जरी तक का हौसला! धन्य है वो जज्बा और धन्य है वो प्रशासनिक फुर्ती, जो एक थाने से दूसरे थाने की सीमाओं में उलझकर रह गई है।
कागजों पर ‘सर्जरी’ जारी है!फिलहाल स्थिति यह है कि:
CMO साहब ने आदेश दे दिया।
अधीक्षक साहब ने पत्र लिख दिया।
पुलिस ने सीमा नाप ली।और अवैध क्लीनिक? वो शायद इन चिट्ठियों के आदान-प्रदान के बीच आराम से मरीजों का ‘इलाज’ कर रहा होगा
जब तक साहब लोग ये तय करेंगे कि FIR किस थाने की स्याही से लिखी जाएगी, तब तक झोलाछाप डॉक्टर साहब एक और डिग्री का ‘आविष्कार’ कर चुके होंगे।
