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October 3, 2026

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न्याय की कुर्सी को चुनौती देना पड़ा भारी

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  • बिना जज के आदेश की ‘अदालत’: बाबू खुद ही तय कर रहा था मुकदमों की तारीखें।

  • शासन की रडार पर गोंडा: लापरवाही से जिले की रैंकिंग गिरी, तो डीएम ने लिया एक्शन।


विस्तृत समाचार: न्याय की कुर्सी को चुनौती देना पड़ा भारी

गोंडा, 09 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश के गोंडा जनपद से एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की खबर सामने आई है। जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने ‘न्यायिक भ्रष्टाचार और लापरवाही’ के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उपजिलाधिकारी (न्यायिक) तरबगंज के रीडर राजेश कुमार पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई केवल एक निलंबन नहीं, बल्कि उन कर्मचारियों के लिए चेतावनी है जो फाइलों को दबाकर न्याय की गति को बाधित करते हैं।

🚨 फर्जीवाड़े का खेल: पोर्टल पर ‘समानांतर सिस्टम’

जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। आरोपी रीडर राजेश कुमार पाण्डेय ने वर्ष 1982 में निस्तारित हो चुके 43 साल पुराने मुकदमों के विरुद्ध आए ‘बाजदायर’ और ‘विलंब माफी’ प्रार्थना पत्रों को बिना पीठासीन अधिकारी (SDM Judicial) की अनुमति के पोर्टल पर ‘मूल वाद’ (Main Case) के रूप में फीड कर दिया।

इसका नतीजा यह हुआ कि पोर्टल पर ये मुकदमे सबसे पुराने लंबित मामलों की सूची में दिखने लगे, जिससे शासन स्तर पर जिले की छवि खराब हुई। हैरानी की बात यह है कि इन फाइलों में न तो कोई ‘आर्डर शीट’ थी और न ही इन्हें कभी सक्षम अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया। रीडर खुद ही पोर्टल पर तारीखें लगा रहा था।

🔍 जिलाधिकारी की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति

जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने इस मामले को ‘न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह करने का षडयंत्र’ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:

  1. न्यायालयी अभिलेखों के रख-रखाव में घोर लापरवाही बरती गई।

  2. पत्रावलियों को जानबूझकर लंबित रखा गया ताकि वादों का निस्तारण न हो सके।

  3. अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर डिजिटल डेटा के साथ छेड़छाड़ की गई।

⚖️ विभागीय जांच और दंड की प्रक्रिया

प्रशासन ने इस मामले को केवल विभागीय लापरवाही नहीं, बल्कि सत्यनिष्ठा पर गंभीर प्रश्नचिह्न माना है। निलंबन के साथ ही आरोपी रीडर के खिलाफ विस्तृत जांच के लिए अपर उपजिलाधिकारी द्वितीय को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान रीडर को केवल जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा और उन्हें जिले से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी।

बड़ा संदेश: डिजिटल सिस्टम से छेड़छाड़ अब मुमकिन नहीं

इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि अब सरकारी फाइलों या ऑनलाइन पोर्टल (IGRS/Revenue Portal) के साथ छेड़छाड़ करना भारी पड़ेगा। डीएम की इस सख्ती से जनपद के अन्य पटलों और न्यायालयों में तैनात कर्मचारियों के बीच खौफ का माहौल है।


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