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October 3, 2026

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नवाबगंज का ‘हाई-प्रोफाइल’ तमाशा: दिग्गजों की मौजूदगी में चला ‘भेदभाव’ का बुलडोजर

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नवाबगंज (गोंडा): मंगलवार को नवाबगंज की सड़कों पर एक ऐसा ‘महायज्ञ’ हुआ, जिसमें आहुति सिर्फ गरीबों की रोजी-रोटी की दी गई। नगर पालिका और पुलिस के भारी-भरकम लाव-लश्कर ने आदर्श स्कूल से तिकोना पार्क तकअपनी उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन इस पूरी कार्रवाई में ‘न्याय’ की जगह ‘नेम-प्लेट’ का असर ज्यादा दिखा।

भारी-भरकम टीम, हल्का परिणाम

अतिक्रमण हटाओ अभियान की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मौके पर नगर पालिका अधिशाषी अधिकारी सर्वेश शुक्ला, थाना अध्यक्ष अभय सिंह, और नगर चौकी इंचार्ज पंकज यादव जैसे दिग्गज खुद मोर्चा संभाले हुए थे। उनके साथ नगर पालिका के अनुभवी सिपहसालार सुरेश कुमार , राजेश कुमार, जितेन्द्र श्रीवास्तव और राजेंद्र तिवारी के साथ सहित दर्जनों पुलिसकर्मी मौजूद रहे।

इतने बड़े लाव-लश्कर को देखकर लगा था कि आज झिलिया चौराहे से लेकर पूरे नगर की सूरत बदल जाएगी और सड़क अपनी असली चौड़ाई वापस पा लेगी। लेकिन अफ़सोस, इतने अधिकारियों की ‘पैनी नजर’ भी उन आलीशान पक्के निर्माणों को नहीं देख पाई जो सीना ताने सड़क पर खड़े थे।

साहबों की नजर और ‘सफेद’ दीवारें

अचंभे की बात यह रही कि सर्वेश शुक्ला जी और उनकी टीम का बुलडोजर उन दुकानों के सामने तो खूब गरजा जिनके पास ‘पैरवी’ की कमी थी । लेकिन जैसे ही दस्ते का सामना रसूखदारों के स्थाई और पक्के अतिक्रमण से हुआ, वहां साहबों की नजरें शायद ‘धुंधली’ हो गईं।

सुरेश कुमार और राजेंद्र तिवारी जैसे बाबू फाइलों के पन्ने पलटते रह गए, लेकिन उन फाइलों में रसूखदारों के पक्के अतिक्रमण को ढहाने वाला पन्ना शायद गायब था। अभय सिंह और पंकज यादव की पुलिस टीम उस वक्त मूकदर्शक बनी रही जब बुलडोजर पक्की दीवारों को ‘सलाम’ ठोककर बगल से गुजर गया।

निष्कर्ष: हाथी के दांत खाने के और…

जनता के बीच चर्चा रही कि यदि इतने बड़े अधिकारियों की मौजूदगी में भी सिर्फ गरीबों के टीन-टप्पर ही हटने थे, तो इतने ‘भारी बल’ की क्या जरूरत थी? क्या यह पूरी कवायद सिर्फ अखबारों में फोटो छपवाने और रसूखदारों को यह बताने के लिए थी कि “देखिए, हमने अभियान भी चलाया और आपकी दीवार भी बचा ली”?

नवाबगंज की जनता का सवाल: “साहब, क्या अतिक्रमण की परिभाषा सिर्फ ‘कच्चे’ निर्माण तक ही सीमित है, या फिर ‘पक्के’ निर्माण वालों का पालिका टैक्स कुछ ज्यादा ही वफादार है?” प्रश्न यह है कि कई ऐसे मकान दुकान बने हैं जो नजर के तहत अवैध अतिक्रमण है पंतु पक्के मकान बच्चे रहे नगर व्यवसाय गोविंद शाह ने बताया की अवैध कब्जा करके पक्का दुकान बना है कागज दिखाने के बाद सिर्फ आश्वासन मिला है कुल मिला करके नगर पालिका व पुलिस ने एक अच्छी पहल की शुरुआत की है परंतु अवैधअतिक्रमण ना हो इस पर विशेष प्रयास रहना चाहिए अवैध निर्माण पक्के को भी चिन्हित करके गिराया जाना अति आवश्यक है नहीं तो गरीबों का भरोसा नगर पालिका जाएगा प्रशासन सेउठ जाएगा लोग यही कहेंगे कि यह अतिक्रमण गरीबों के लिए है रसूखदारो लिए नहीं ।


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