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October 3, 2026

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ज़ब : राजा अशरफ बख्श ने बादशाहत छोड़ थामी थी 1857 मे बंदूक, अंग्रेजों से लोहा लेते हुए शहीद हुए

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अशफाक आलम

गौरा चौकी (गोंडा) युगनव टाइम्स लाइव/1857 के गदर में कस्बा राजा अशरफ बख्श ने बादशाहत छोड़ थामी थी बंदूक, अंग्रेजों से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे
उन्होंने कहा था कि दास्तान मेरी मेरे बाद लिखी जाएगी, लाख मिट्टी में दफन कर दे जमाना मुझे, लेकिन सुन लो, यूं ही सदियों मेरी आवाज सुनी जाएगी।
आज हम जिस आजाद भारत में आन बान शान से जी रहे हैं उसके लिए हमारे अमर बलिदानियों ने देश के लिए बड़ी कुर्बानियां दी हैं l उन्हीं अमर बलदानियों में से एक है कस्बा के राजा अशरफ बख्श l गोंडा जिले के बूढ़ापायर परगना के तत्कालीन राजा अशरफ बख्श ने 1857 की गदर में अपने पराक्रम से अंग्रेजों के छक्के छुड़ा कर देशवासियों को आजाद करने में अहम भूमिका निभाई थी l सन 1857 के ऐतिहासिक विद्रोह में अंग्रेजों ने अवध पर कब्जा करने का प्रयास किया तो अयोध्या से उत्तर सरयू नदी के किनारे लगभग 20 किलोमीटर लंबे लमती लोलपुर नामक स्थान पर अवध की बेगम हजरत महल के नेतृत्व में देशी रजवाड़ों की सेना ने अंग्रेजों से लोहा लिया l इस सेना की कमान संभालने वालों में राजा अशरफबक्स भी शामिल थे l 27 दिसंबर से 6 दिन तक चले इस युद्ध में अंग्रेजी सेनापति जनरल होप ग्रांट के माथे पर चिंता की लकीरों उभर आई l उसने डिवाइड एंड रूल ‘ फूट डालो और राज करो ‘ का परखा हुआ नुस्खा अपनाया , फलस्वरुप उसी रियासत के राजा जिन्हें तोपों के लिए गोले सप्लाई करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी उन्होंने भितरघात कर बालू भरकर सप्लाई कर दिया l इसके चलते राजा अशरफ बख्श को मैदान से पीछे हटना पड़ा l उन्होंने नवाबगंज ब्लाक के हुलापुर तालिब गांव में खुदाबख्श के यहां शरण ली l किसी ने राजा अशरफ बक्श के होलापुर गांव में छिपे होने की मुखबिरी अंग्रेजों से कर दी जिसके बाद अंग्रेजों ने होलापुर गांव को घेर लिया l जब दूसरे दिन अंग्रेजों ने होलापुर गांव में तलाशी लेनी शुरू कर दी तो जिस फूस के मकान में राजा अशरफ छिपे हुए थे उस मकान में अंग्रेजों ने घेरकर आग लगा दी जिसमें राजा अशरफ बख्श अपने घोड़े के साथ जलकर शहीद हो गए l
इस वीर योद्धा की वीर गाथा लिखते लिखते कलम कांप उठती है जब यह पता चलता है कि ग्राम सभा कस्बा खास में उनका घर खंडहर और कोट कूड़ा करकट के ढेर में तब्दील हो गया है उनके वंशज आज गरीबी और मुफलिसी में अपना जीवन यापन कर रहे हैं l न तो किसी नेता ने आज तक उनकी सुध ली और न ही किसी सरकार ने lउन्होंने नवाबगंज ब्लाक के हुलापुर तालिब गांव में खुदाबख्श के यहां शरण ली l किसी ने राजा अशरफ बक्श के होलापुर गांव में छिपे होने की मुखबिरी अंग्रेजों से कर दी जिसके बाद अंग्रेजों ने होलापुर गांव को घेर लिया l जब दूसरे दिन अंग्रेजों ने होलापुर गांव में तलाशी लेनी शुरू कर दी तो जिस फूस के मकान में राजा अशरफ छिपे हुए थे उस मकान में अंग्रेजों ने घेरकर आग लगा दी जिसमें राजा अशरफ बख्श अपने घोड़े के साथ जलकर शहीद हो गए l
इस वीर योद्धा की वीर गाथा लिखते लिखते कलम कांप उठती है जब यह पता चलता है कि ग्राम सभा कस्बा खास में उनका घर खंडहर और कोट कूड़ा करकट के ढेर में तब्दील हो गया है उनके वंशज आज गरीबी और मुफलिसी में अपना जीवन यापन कर रहे हैं l न तो किसी नेता ने आज तक उनकी सुध ली और न ही किसी सरकार ने l


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