जब बचपन में कांच की गोलियां खेला करता था, बच्चों से झगड़ा लड़ाई किया करता था
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- मोहम्मद सुलेमान ब्यूरो
गोंडा ( युगनव टाइम्स लाइव ) गुजरा हुआ जमाना आता नहीं दोबारा जब मैं बचपन में बच्चों के साथ कांच की गोलियां खेला करता था और बच्चों से झगड़ा लड़ाई किया करता था वह दिन आज भी मुझे याद है मेरा जन्म 14 जुलाई 1970 को हुआ मेरे माता-पिता काफी गरीब थे और मैं तब बहुत चंचल किशन का था अक्सर किसी के खेत से गन्ना तोड़ कर ले आता था किसी के खेत में चना बोया हुआ करते थे उसे मैं चुपके से ले आता था और जब घर पहुंचता था तो हमारे माता-पिता ऐसा करने से रोकते थे और हमें मारते थे और समझाते थे एक बार तो मैं एक गन्ना तोड़कर चुपके से ले आया उसके एवज में हमारे पिता ने मुझे घाट में बांध दिया और खूब मेरी धुनाई की मेरी मां आकर मुझे बचाई वह बचपन की यादें जब छोटे-छोटे बच्चों के साथ मैं अक्सर उल्टा सीधा काम क्या करता था और घर पर आकर पिता का मार खाता था मेरे साथ मेरे चार-पांच और दोस्त है जो मेरे ही उम्र के थे सभी लोग मेरे साथ कांच की गोलियां खेलते थे और हम लोग आपस में झगड़ा भी करते थे और थोड़ी देर में फिर घुल मिल जाते थे लेकिन वह जमाना अब नहीं आने वाला है धीरे-धीरे में बढ़ा हुआ और घर में गरीबी थी इस वजह से मैं पढ़ नहीं पाया स्कूल गया तो मात्र डेढ़ घंटा पढ़ने के बाद झगड़ा लड़ाई करके बच्चों से घर चला आया फिर मैं पढ़ने नहीं गया 2 जून 1988 को मेरी शादी हो गई और मेरी पत्नी पढ़ी लिखी थी उसने मुझे धीरे-धीरे पढ़ाया वह दिन भी मुझे याद है की डेढ़ घंटा स्कूल में पढ़ाई करने के बाद बच्चों से झगड़ा करके घर आ गया था और मैं यह सोचा था कि अब नहीं पढ़ पाएंगे लेकिन मेरी पत्नी ने मुझे पढ़ाया तब जाकर मैं इस काबिल बना मेरे मां-बाप इस दुनिया में नहीं है लेकिन उन्होंने मुझे जो प्यार और स्नेह दिया वह आज भी मुझे याद है
मेरे मां बाप ने मेरा नाम भी बहुत अच्छा रखा जो एक पैगंबर का नाम है मोहम्मद सुलेमान लेकिन यह नाम उस पैगंबर का है जिसका राज सांप बिच्छू हर जानवरों पर चलता है सांप बिच्छू या कोई भी जहरीला जानवर है इनके नाम से कापता है मैं बहुत खुशनसीब हूं कि मेरे माता पिता ने मेरा नाम मोहम्मद सुलेमान रखा!बार तो मैं एक गन्ना तोड़कर चुपके से ले आया उसके एवज में हमारे पिता ने मुझे घाट में बांध दिया और खूब मेरी धुनाई की मेरी मां आकर मुझे बचाई वह बचपन की यादें जब छोटे-छोटे बच्चों के साथ मैं अक्सर उल्टा सीधा काम क्या करता था और घर पर आकर पिता का मार खाता था मेरे साथ मेरे चार-पांच और दोस्त है जो मेरे ही उम्र के थे सभी लोग मेरे साथ कांच की गोलियां खेलते थे और हम लोग आपस में झगड़ा भी करते थे और थोड़ी देर में फिर घुल मिल जाते थे लेकिन वह जमाना अब नहीं आने वाला है धीरे-धीरे में बढ़ा हुआ और घर में गरीबी थी इस वजह से मैं पढ़ नहीं पाया स्कूल गया तो मात्र डेढ़ घंटा पढ़ने के बाद झगड़ा लड़ाई करके बच्चों से घर चला आया फिर मैं पढ़ने नहीं गया 2 जून 1988 को मेरी शादी हो गई और मेरी पत्नी पढ़ी लिखी थी उसने मुझे धीरे-धीरे पढ़ाया वह दिन भी मुझे याद है की डेढ़ घंटा स्कूल में पढ़ाई करने के बाद बच्चों से झगड़ा करके घर आ गया था और मैं यह सोचा था कि अब नहीं पढ़ पाएंगे लेकिन मेरी पत्नी ने मुझे पढ़ाया तब जाकर मैं इस काबिल बना मेरे मां-बाप इस दुनिया में नहीं है लेकिन उन्होंने मुझे जो प्यार और स्नेह दिया वह आज भी मुझे याद है
मेरे मां बाप ने मेरा नाम भी बहुत अच्छा रखा जो एक पैगंबर का नाम है मोहम्मद सुलेमान लेकिन यह नाम उस पैगंबर का है जिसका राज सांप बिच्छू हर जानवरों पर चलता है सांप बिच्छू या कोई भी जहरीला जानवर है इनके नाम से कापता है मैं बहुत खुशनसीब हूं कि मेरे माता पिता ने मेरा नाम मोहम्मद सुलेमान रखा!
