वज़ीरगंज : ऐ मोर बाबू का हम बोझ बानी ? मूक बधिर मां समेत दो बहनों व एक भाई की कहानी
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वज़ीरगंज : ऐ मोर बाबू का हम बोझ बानी ?
मूक बधिर मां समेत दो बहनों व एक भाई की कहानी
मोहम्मद सुलेमान राकेश कुमार सिंह
गोंडा ( युगनव टाइम्स लाइव ) मुफलिसी के कांटे कभी-कभी किसी एक को नहीं बल्कि पूरे परिवार को जख्मी कर देता है। ग़रीबी का जख्म भी ऐसा कि लाड़-प्यार से पाल पोस कर बड़ी की गई दो बेटी व एक बेटा खुद को बोझ बताते हुए बाप से जहर देने की इशारा कर रही है। ये दर्द कोई दास्तां या किस्सा कहानी नहीं बल्कि उन मूक-बधिर मां समेत दो बहनों व एक भाई की जिंदगी की तल्ख हकीकत है जो आज सिसकती जिंदगी जी रही है। सियासत की रहनुमाई करने वाले जन के प्रतिनिधि हैं या फिर समाज की सेवा का दम्भ भरने वाले कथित समाजसेवी, किसी को इनकी तरफ ताकने तक की फुरसत नहीं है।
जिंदगी की इस तल्ख हकीकत को दिखाने के लिए हम आपको ले चलते हैं वजीरगंज विकास खंड की ग्राम पंचायत सहिबापुर में। यहां के हजारीलाल गुप्ता गोंडा-अयोध्या रोड पर एक गुमटी रखकर पान मसाला बेचकर अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं। किराए की जमीन पर सरकारी कालोनी के आशियाने में इनका कुनबा गुरबत के साए में जिंदगी बसर कर रहा है। ऐसे में भगवान ने भी इनके साथ अन्याय किया, घर के आंगन में मूक-बधिर दो बेटी व एक बेटे के जन्म से खुशियों की जगह दुख टूट पड़ा। वक्त गुजरा तो बेटियां सयानी हो गई, ऐसे में जहां कहीं भी रिश्ते की बात चलाई वहां से बेटियों का बोल न पाना संकट बन गया है। कई जगह से रिश्ते टूटे तो बाप भी टूट गया। बेटियों की शादी किसी तरह की लेकिन ताना ने उसे कहीं का न छोड़ा। बेटियां काजल, सोनिया व बेटा काके के आंखों के सामने बाप के आंसू देखी तो मानो कह रही है…..कि का बाबू हम बोझ बानी, हमका जहर दई देव। मूक बधिर मां गुड़िया रो-रो कर हाथों से इशारा करती है मानो कहना चाहती है कि किसी तरह बेटियों का रिश्ता हो जाता, समझों चारों धाम कर दर्शन हो जाता।
नहीं मिल रही पेंशन
तंगहाली से जूझते हजारीलाल को सरकारी सौगात में केवल आवास मिला है उसने किराए की जमीन लेकर किसी तरह आवास तो बना लिया है। समाज कल्याण विभाग ने अर्जी के बाद भी मां, दोनों बहनों व उसके एक भाई के लिए किसी तरह की राहत स्वीकृति नहीं की तो पिता हजारीलाल को पेंशन भी नहीं मिली। मुफलिसी इस कदर है कि घर में कभी-कभी फांकों तक की नौबत बन आती है।
बोले प्रधान
सहिबापुर के प्रधान दिनेश सिंह का कहना है कि वास्तव में लोग गरीब हैं,इनके पेंशन बनवाने की कार्रवाई की जा रही है। परिवार को गरीबी से उबारने का पूरा प्रयास होगा और सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। बीडीओ वजीरगंज ने बताया कि उन्हें इस परिवार के बारे में कोई जानकारी नहीं है।ऐ मोर बाबू का हम बोझ बानी ?
मूक बधिर मां समेत दो बहनों व एक भाई की कहानी
मोहम्मद सुलेमान राकेश कुमार सिंह
गोंडा ( युगनव टाइम्स लाइव ) मुफलिसी के कांटे कभी-कभी किसी एक को नहीं बल्कि पूरे परिवार को जख्मी कर देता है। ग़रीबी का जख्म भी ऐसा कि लाड़-प्यार से पाल पोस कर बड़ी की गई दो बेटी व एक बेटा खुद को बोझ बताते हुए बाप से जहर देने की इशारा कर रही है। ये दर्द कोई दास्तां या किस्सा कहानी नहीं बल्कि उन मूक-बधिर मां समेत दो बहनों व एक भाई की जिंदगी की तल्ख हकीकत है जो आज सिसकती जिंदगी जी रही है। सियासत की रहनुमाई करने वाले जन के प्रतिनिधि हैं या फिर समाज की सेवा का दम्भ भरने वाले कथित समाजसेवी, किसी को इनकी तरफ ताकने तक की फुरसत नहीं है।
जिंदगी की इस तल्ख हकीकत को दिखाने के लिए हम आपको ले चलते हैं वजीरगंज विकास खंड की ग्राम पंचायत सहिबापुर में। यहां के हजारीलाल गुप्ता गोंडा-अयोध्या रोड पर एक गुमटी रखकर पान मसाला बेचकर अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं। किराए की जमीन पर सरकारी कालोनी के आशियाने में इनका कुनबा गुरबत के साए में जिंदगी बसर कर रहा है। ऐसे में भगवान ने भी इनके साथ अन्याय किया, घर के आंगन में मूक-बधिर दो बेटी व एक बेटे के जन्म से खुशियों की जगह दुख टूट पड़ा। वक्त गुजरा तो बेटियां सयानी हो गई, ऐसे में जहां कहीं भी रिश्ते की बात चलाई वहां से बेटियों का बोल न पाना संकट बन गया है। कई जगह से रिश्ते टूटे तो बाप भी टूट गया। बेटियों की शादी किसी तरह की लेकिन ताना ने उसे कहीं का न छोड़ा। बेटियां काजल, सोनिया व बेटा काके के आंखों के सामने बाप के आंसू देखी तो मानो कह रही है…..कि का बाबू हम बोझ बानी, हमका जहर दई देव। मूक बधिर मां गुड़िया रो-रो कर हाथों से इशारा करती है मानो कहना चाहती है कि किसी तरह बेटियों का रिश्ता हो जाता, समझों चारों धाम कर दर्शन हो जाता।
नहीं मिल रही पेंशन
तंगहाली से जूझते हजारीलाल को सरकारी सौगात में केवल आवास मिला है उसने किराए की जमीन लेकर किसी तरह आवास तो बना लिया है। समाज कल्याण विभाग ने अर्जी के बाद भी मां, दोनों बहनों व उसके एक भाई के लिए किसी तरह की राहत स्वीकृति नहीं की तो पिता हजारीलाल को पेंशन भी नहीं मिली। मुफलिसी इस कदर है कि घर में कभी-कभी फांकों तक की नौबत बन आती है।
बोले प्रधान
सहिबापुर के प्रधान दिनेश सिंह का कहना है कि वास्तव में लोग गरीब हैं,इनके पेंशन बनवाने की कार्रवाई की जा रही है। परिवार को गरीबी से उबारने का पूरा प्रयास होगा और सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। बीडीओ वजीरगंज ने बताया कि उन्हें इस परिवार के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
