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October 3, 2026

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कदम ए रसूल पर सातवें मोहर्रम को लगने वाला मेला जिले में है खास , सबकी मुरादे यहां होती हैं पूरी

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अशफाक आलम
गौरा चौकी (गोंडा) युग नव टाइम्स लाइव / गोंडा जिले के बभनजोत क्षेत्र के ग्राम कस्बा खास में कदमें रसूले पर सातवीं मोहर्रम को लगने वाला मेला बड़ा ही ऐतिहासिक है लगभग 300 साल पहले से लगने वाले इस मेले में जिले ही नहीं परदेश भर के जायरीन अकीदत के साथ हजारों की संख्या में आते हैं मन्नतें मांगते हैं l लोगों का विश्वास है कि यहां मन्नतें मांगने से उनकी मुरादें पूरी होती है l आपसी सौहार्द और हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक सातवीं मोहर्रम का लगने वाला मेला बड़ा ही पारंपरिक है l सदियों से यहां सभी धर्मों के लोग ताजियादारी करते है सद्दा निकालते हैं l

मोहर्रम के महीने की सात आठ नौ दस तारीख को कस्बा के कदमें रसूल पर क्षेत्र भर से लोग मेला देखने मन्नते मांगने मिठाई चढ़ाने आते हैं l गंगा जमुनी तहजीब की ऐसी मिसाल आपको कहीं देखने को नहीं मिलेगी l कदमें रसूल के खादिम कादरी इस्लामुद्दीन अहमद ने बताया कि मोहर्रम के अलावा भी लोग साल भर जुम्मेरात व जुम्मा को सिन्नी चढ़ाने नियाज कराने आते हैं l उन्होंने कदमे रसूल के इतिहास के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि शहंशाह तुगलक के दौर में पहले यह मुबारक पत्थर जिस पर रसूल सल्लo के कदम के निशान मौजूद हैं ग्राम सभा गाजीपुर में आया कई सालों तक वह प्रिंसिपल हाजी महमूद खान के घर पर रखा था l जब यह खबर कस्बा के राजा अशरफ बक्स को लगी तो उन्होंने गाजीपुर से इस मुबारक पत्थर को कस्बा ले जाने का मंसूबा बनाया l जब राजा अशरफ बक्स यह मुबारक पत्थर गाजीपुर से कस्बा ले जाने लगे तो लगभग 1 किलोमीटर की दूरी मे 7 बैल गाड़ियों के धुर टूट गए ऐसा लोग बुजुर्गों से सुनते आए हैं l बाद में यह मुबारक पत्थर कस्बा में लाकर नसब कर दिया गया और ऊपर से गोल गुंबद तामीर कर दिया गया तभी से सभी लोग कदमें रसूल के नाम से जानते हैं l इस तरह का मुबारक पत्थर आपको जिले ही नहीं पूरे प्रदेश में कहीं नहीं देखने को मिलेगा

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गोंडा जिले के बभनजोत क्षेत्र के ग्राम कस्बा खास में कदमें रसूले पर सातवीं मोहर्रम को लगने वाला मेला बड़ा ही ऐतिहासिक है लगभग 300 साल पहले से लगने वाले इस मेले में जिले ही नहीं परदेश भर के जायरीन अकीदत के साथ हजारों की संख्या में आते हैं मन्नतें मांगते हैं l लोगों का विश्वास है कि यहां मन्नतें मांगने से उनकी मुरादें पूरी होती है l आपसी सौहार्द और हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक सातवीं मोहर्रम का लगने वाला मेला बड़ा ही पारंपरिक है l सदियों से यहां सभी धर्मों के लोग ताजियादारी करते है सद्दा निकालते हैं l

मोहर्रम के महीने की सात आठ नौ दस तारीख को कस्बा के कदमें रसूल पर क्षेत्र भर से लोग मेला देखने मन्नते मांगने मिठाई चढ़ाने आते हैं l गंगा जमुनी तहजीब की ऐसी मिसाल आपको कहीं देखने को नहीं मिलेगी l कदमें रसूल के खादिम कादरी इस्लामुद्दीन अहमद ने बताया कि मोहर्रम के अलावा भी लोग साल भर जुम्मेरात व जुम्मा को सिन्नी चढ़ाने नियाज कराने आते हैं l उन्होंने कदमे रसूल के इतिहास के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि शहंशाह तुगलक के दौर में पहले यह मुबारक पत्थर जिस पर रसूल सल्लo के कदम के निशान मौजूद हैं ग्राम सभा गाजीपुर में आया कई सालों तक वह प्रिंसिपल हाजी महमूद खान के घर पर रखा था l जब यह खबर कस्बा के राजा अशरफ बक्स को लगी तो उन्होंने गाजीपुर से इस मुबारक पत्थर को कस्बा ले जाने का मंसूबा बनाया l जब राजा अशरफ बक्स यह मुबारक पत्थर गाजीपुर से कस्बा ले जाने लगे तो लगभग 1 किलोमीटर की दूरी मे 7 बैल गाड़ियों के धुर टूट गए ऐसा लोग बुजुर्गों से सुनते आए हैं l बाद में यह मुबारक पत्थर कस्बा में लाकर नसब कर दिया गया और ऊपर से गोल गुंबद तामीर कर दिया गया तभी से सभी लोग कदमें रसूल के नाम से जानते हैं l इस तरह का मुबारक पत्थर आपको जिले ही नहीं पूरे प्रदेश में कहीं नहीं देखने को मिलेगा


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