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यहां स्वास्थ्य एमरजेंसी का मतलब मौत 

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यहां स्वास्थ्य एमरजेंसी का मतलब मौत

 

नवाबगंज (गोंडा) युगनव टाइम्स लाइव / कल्यानपुर गाँव के रहने वाले एक युवक ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक और डाक्टरों की शिकायत जिलाधिकारी से की,और आरोप लगाया है कि डाक्टरों और अधीक्षक की लापरवाही के कारण उसके भाई की जान चली गई थी।

कल्यानपुर गाँव राम निहोर मजरा निवासी दुर्गेश यादव पुत्र राम गुलाम यादव ने जिलाधिकारी को दिये गये शिकायती प्रार्थनापत्र में बताया कि बीती 15 जनवरी की शाम करीब 07 बजे उसका छोटा भाई सुनील नवाबगंज बाजार से सामान लेकर घर वापस जा रहा था। रास्ते में वह जब फातिमा मेमोरियल एजुकेशनल इंटर कॉलेज के सामने कृषि वानिकी फार्म सामने पंहुचा था तभी पीछे से एक अनियंत्रित तेज रफ्तार कार ने उसे टक्कर मार दी जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। अपने भाई को घायलावस्था में नवाबगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पंहुचा तो इमर्जेंसी में कोई डाक्टर मौजूद नहीं मिला और ना ही अधीक्षक डॉ विनयेश त्रिपाठी मौजूद मिले।आनन-फानन में सीएचसी पर मौजूद कर्मियों ने एक होम्योपैथिक चिकित्सक को बुलाकर दिखाया तो डाक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। पीड़ित का कहना है कि डाक्टरों की लापरवाही से उसके भाई की मौत हुई। इस मामले में पीड़ित जिलाधिकारी और सीएमओ द्वारा जनपद के समस्त अधीक्षकों को सीएचसी पर ही 24 घंटे अपने आवास पर रहने के सख्त निर्देश दिए गए हैं लेकिन उसके बाद भी नवाबगंज के अधीक्षक नदारद ही रहते हैं उनके आवास पर अधिकतर ताला ही लटका रहता है इसके अतिरिक्त उनके आवास के बगल ही इमर्जेंसी कक्ष है वहां भी अक्सर ताला लगा मिलता है। सीएचसी पर डाक्टरों के मनमाने रवैये से मरीज़ और तीमारदार परेशान रहते हैं। इसके पूर्व भी कई बार सीएचसी अधीक्षक डॉ विनयेश त्रिपाठी विवादों के घेरे में आ चुके हैं कई बार शिकायत भी हुई लेकिन उनकी पंहुच के चलते वह बचते रहे। सीएचसी पर कार्यरत तमाम कर्मचारियों ने नाम ना बताने की शर्त पर बताया कि अधीक्षक महोदय कस्बे के कई निजी अस्पतालों में भी अपनी सेवा दे रहे हैं यही कारण है कि वह अधिकतर बाहर ही रहते हैं। शायद सीएचसी पर अव्यवस्थाओं की भरमार और डाक्टरों की लापरवाही का सबसे बड़ा कारण यही है।

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