परशुराम जयंती पर सांस्कृतिक चेतना का संदेश: डॉ. विद्यासागर उपाध्याय
1 min read
175,303 views
संवाददाता रूबी सोनी
अयोध्या। नाका हनुमानगढ़ी में सनातन ब्राह्मण समाज न्यास के तत्वावधान में परशुराम जयंती के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शंकराचार्य परिषद के राष्ट्रीय पार्षद डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की और अपने संबोधन में सनातन परंपरा व सांस्कृतिक मूल्यों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में ब्राह्मण की भूमिका सदैव मार्गदर्शक और संरक्षक की रही है। “आचरण की पराकाष्ठा ही परशुरामत्व है,” कहते हुए उन्होंने भगवान परशुराम के जीवन को तप, त्याग और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक बताया।
डॉ. उपाध्याय ने कहा कि केवल शस्त्र धारण करना ही परशुराम का आदर्श नहीं है, बल्कि उनके सिद्धांतों को जीवन में उतारना अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने अक्षय तृतीया के महत्व का उल्लेख करते हुए इसे सत्कर्म और धर्म पालन के लिए प्रेरणादायी बताया।
उन्होंने ब्राह्मण समाज को अपने दायित्वों के प्रति सजग रहने का आह्वान करते हुए कहा कि वर्तमान समय में सामाजिक समरसता बनाए रखते हुए अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना आवश्यक है। साथ ही, नई पीढ़ी को वैदिक ज्ञान के साथ आधुनिक शिक्षा और विज्ञान से जोड़ने पर भी बल दिया।
कार्यक्रम में पंडित शिव शंकर शास्त्री, गोकरण द्विवेदी, उपेंद्र शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। आयोजन को सफल बनाने में पंडित राजकुमार मिश्रा, दिनेश चंद्र चतुर्वेदी, अजय रंजन पांडे, नागेंद्रमणि त्रिपाठी और राजेश तिवारी का सहयोग रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महंत रामदास जी महाराज ने की, जबकि संचालन आदित्य नारायण मिश्र और संदीप तिवारी ने संयुक्त रूप से किया। अंत में अतिथियों को सम्मानित कर कार्यक्रम का समापन हुआ।
