रामायण चित्रों में जीवंत हुए श्रीराम के आदर्श कम्पोजिट विद्यालय दलीपपुरवा में सम्पन्न हुई 9 दिवसीय रामायण चित्रकला कार्यशाला
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कम्पोजिट विद्यालय दलीपपुरवा, विकासखंड मनकापुर, जनपद गोण्डा में अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान, अयोध्या (संस्कृत विभाग, उत्तर प्रदेश) के तत्वावधान में दिनांक 7 मई से 17 मई 2025 तक 9 दिवसीय रामायण चित्रकला कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को श्रीराम के जीवन मूल्यों — सत्य, त्याग, सेवा, भक्ति एवं मर्यादा — से जोड़ते हुए उनकी रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करना था।
प्रत्येक दिवस विद्यार्थियों ने रामायण के किसी एक प्रमुख प्रसंग को चुना और उसे रंगों, रेखाओं एवं भावनाओं के माध्यम से पोस्टर चित्रों के रूप में उकेरा।
राम का वनवास, सीता हरण, हनुमान द्वारा लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना, सेतु निर्माण, तथा राम-रावण युद्ध जैसे प्रेरणास्पद प्रसंगों को विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशक्ति और कलात्मक प्रतिभा से अत्यंत जीवंत स्वरूप प्रदान किया।
कार्यशाला में श्री मनीष वर्मा (समन्वयक) एवं श्री गया प्रसाद आनन्द (प्रशिक्षक) ने बच्चों को चित्रकला की बारीकियाँ सिखाईं और रामायण के भावों को सरल, सरस शैली में समझाया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि चित्रकला केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि यह विचार, संवेदना और संदेश का एक सशक्त माध्यम है।
कार्यशाला के समापन दिवस पर एक चित्रकला प्रदर्शनी आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए उत्कृष्ट चित्रों का सार्वजनिक प्रदर्शन किया गया। सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक, समस्त शिक्षकगण, अभिभावकगण एवं स्थानीय समुदाय के अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे और बच्चों की प्रतिभा की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
श्री मनीष वर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा —
“रामायण केवल धार्मिक आख्यान नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों की अमूल्य धरोहर है। जब बच्चे चित्रों के माध्यम से इन प्रसंगों को आत्मसात करते हैं, तो उनका व्यक्तित्व अधिक सुदृढ़ व संस्कारित बनता है।”
श्री गया प्रसाद आनन्द ने कहा —
“चित्रकला बच्चों की मौन भावनाओं की मुखर भाषा है। रामायण आधारित यह कार्यशाला उनके अंतर्मन को सकारात्मक दिशा प्रदान करती है।”
इस कार्यशाला में तन्वी सिंह, नयनशी एवं रोहन ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय, एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया, वहीं शिवानी वर्मा ने ओवरऑल चैम्पियनशिप अपने नाम की।
यह कार्यशाला बच्चों के लिए केवल चित्रकला का प्रशिक्षण नहीं, अपितु आदर्श जीवन मूल्यों के बीजारोपण का एक सशक्त माध्यम सिद्ध हुई।
