तरबगंज तहसील में न्याय की अनूठी परंपरा: तारीख पे तारीख, साहब गायब!
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पारखी नगर – एक खबर ऐसा भी
उत्तर प्रदेश तरबगंज गोण्डा तहसील में न्याय की एक नई और अनोखी परंपरा शुरू हो गई है। यहां वादी और अधिवक्ता न्याय की आस में आते हैं, लेकिन उन्हें मिलता है सिर्फ एक चीज – अगली तारीख! जी हां, यहां एसडीएम और तहसीलदार साहब कोर्ट पर बैठने की जहमत ही नहीं उठाते। आखिर क्यों? शायद उन्हें अपने कमरे से इतना प्रेम है कि वे उन्हें छोड़कर अपनी कोर्ट की कुर्सी पर बैठना ही नहीं चाहते।
एसडीएम कार्यालय? अरे, वह तो अब कर्मचारियों का पिकनिक स्पॉट बन गया है। आते हैं, फाइलों पर प्यार से अगली तारीख लिखते हैं और फिर अपनी दुनिया में मस्त।
जनसुनवाई
वह तो किसी पौराणिक कथा की तरह हो गई है, जिसके बारे में सिर्फ सुना जाता है, कभी देखी नहीं जाती। और कोर्ट? साहब, कोर्ट तो यहां कभी-कभार ही सजता है, मानो किसी दुर्लभ तारे का दर्शन हो गया हो।
बार एसोसिएशन तरबगंज के सुरेंद्र सिंह ने बताया कि एसडीएम और तहसीलदार अपनी मर्जी के मालिक हैं। उन्हें सप्ताह में एक दिन भी कोर्ट आने की क्या जरूरत है? आखिर वादी हैं, ठोकरें खाते रहेंगे, यही तो सिस्टम है!
अधिवक्ताओं ने तो कई बार गुहार लगाई, कि हुजूर, कभी तो कोर्ट कर लीजिए। लेकिन साहबों के कानों तक उनकी आवाज पहुंची ही नहीं, शायद उनके कानों पर फाइलों का मोटा तकिया लगा हुआ है। थक-हारकर, शुक्रवार को बार एसोसिएशन के बहादुर अधिवक्ताओं ने विरोध का बिगुल बजा दिया। उन्होंने एसडीएम और तहसीलदार के आलीशान (खाली) कक्षों का घेराव किया। अब उन्होंने प्रण लिया है कि जब तक ये ‘कामचोर’ अधिकारी हट नहीं जाते, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
तो तरबगंज के न्यायप्रिय नागरिकों, अगली बार जब आपको अपनी जमीन या किसी और मामले में न्याय चाहिए हो, तो तहसील मत आइए। सीधे कैलेंडर लेकर बैठ जाइए और हर तारीख पर एक नया निशान लगाते रहिए। क्या पता, किसी शुभ दिन साहब गलती से कोर्ट में विराजमान हो जाएं! और हां, अगर आपको एसडीएम या तहसीलदार दिख जाएं, तो तुरंत उनकी फोटो खींचकर वायरल कर दीजिए, ताकि पता तो चले कि वे दिखते कैसे हैं !
