तरबगंज तहसील में अधिवक्ताओं का जोरदार विरोध प्रदर्शन
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युगनव टाइम्स
तरबगंज गोंडा, सोमवार को तरबगंज तहसील परिसर न्याय और जनहित की एक बुलंद आवाज़ का साक्षी बना, जब सैकड़ों अधिवक्ता एसडीएम राजीव मोहन सक्सैना की उस रिपोर्ट के खिलाफ सड़कों पर उतरे जिसमें तहसील से 16 गांवों को हटाने की अनुशंसा की गई है। इस रिपोर्ट को शासन को भेजा गया है, और इसका विरोध धीरे-धीरे जनांदोलन का रूप लेता जा रहा है।
प्रशासनिक निर्णय पर अधिवक्ताओं की आपत्ति
बार एसोसिएशन तरबगंज के वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र नाथ पांडेय ने बताया कि यह प्रस्ताव पूरी तरह से जनविरोधी है और इससे न सिर्फ ग्रामीणों को प्रशासनिक व न्यायिक कार्यों के लिए अधिक दूरी तय करनी पड़ेगी, बल्कि अधिवक्ताओं की कार्यप्रणाली भी प्रभावित होगी। अधिवक्ताओं ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि यह निर्णय बिना किसी जनसुनवाई और समुचित प्रक्रिया के लिया गया है।
राजनीतिक प्रतिनिधियों की चुप्पी पर नाराजगी
प्रदर्शनकारियों ने केवल प्रशासनिक अधिकारियों ही नहीं, बल्कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी गहरी नाराजगी जताई। अधिवक्ताओं का कहना था कि जिन प्रतिनिधियों को जनता ने चुना है, वे आज जनता की आवाज़ बनने के बजाय मूक दर्शक बने हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने सांसद और विधायकों से मांग की कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और प्रस्तावित रिपोर्ट को निरस्त कराने में अहम भूमिका निभाएं।
प्रमुख अधिवक्ताओं की एकजुटता
विरोध प्रदर्शन में जटाशंकर सिंह, अरुण सिंह, सुनील तिवारी, विनोद पाठक, अभिमन्यु शुक्ला और प्रमोद कुमार शुक्ला जैसे अनेक वरिष्ठ अधिवक्ता सम्मिलित हुए। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह केवल अधिवक्ताओं की नहीं, बल्कि आम जनता की लड़ाई है, जिसे पीछे नहीं हटने दिया जाएगा।
भविष्य की रणनीति तैयार
बार एसोसिएशन ने इस मुद्दे पर एक आपात बैठक बुलाकर आगे की रणनीति पर विचार किया। तय किया गया कि अगर प्रशासन इस रिपोर्ट को वापस नहीं लेता, तो जिला मुख्यालय तक पदयात्रा की जाएगी और आवश्यकता पड़ी तो में धरना प्रदर्शन को जोर किया जाएगा। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यह संघर्ष शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से लड़ा जाएगा, लेकिन जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
ग्रामीण जनता की भी बढ़ती भागीदारी
अब इस आंदोलन में ग्रामीण जनता भी सक्रिय रूप से जुड़ रही है। प्रस्तावित बदलाव से प्रभावित गांवों के नागरिकों ने अधिवक्ताओं का समर्थन करते हुए कहा कि वे भी इस निर्णय के खिलाफ आवाज़ बुलंद करेंगे। आने वाले दिनों में गांवों में जनजागरण अभियान चलाने की योजना बनाई गई है।
निष्कर्ष
तरबगंज तहसील में अधिवक्ताओं द्वारा शुरू किया गया यह विरोध प्रशासनिक निर्णय के खिलाफ केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि लोकतंत्र की शक्ति का प्रतीक बनता जा रहा है। अब यह देखना शेष है कि शासन और जनप्रतिनिधि इस आवाज को सुनते हैं या फिर जनता को और कठोर कदम उठाने पड़ेंगे।
