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October 3, 2026

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श्रद्धा और विश्वास जब उत्पन्न होता है तो आदमी पुरुषार्थ करता है :- अनिल शास्त्री

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श्रद्धा और विश्वास जब उत्पन्न होता है तो आदमी पुरुषार्थ कर

पंश्याम त्रिपाठी  / सुशील तिवारी उर्फ आशू/सुरेश कुमार तिवारी

गोंडा 28 मईlपुरुष का तात्पर्य विवेक संपन्न मनुष्य से है अर्थात विवेक शील मनुष्यों के लक्ष्यों की प्राप्ति ही पुरुषार्थ है। प्रायः मनुष्य के लिये वेदों में चार पुरुषार्थों का नाम लिया गया है – धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। इसलिए इन्हें ‘पुरुषार्थचतुष्टय’ भी कहते हैं। नगर पंचायत तरबगंज के रेतादलसिह सिद्ध पीठ जीत दास बाबा स्थान पर नौ दिवसीय संगीतमयी कथा के चौथे दिवस शिव पार्वती की विवाह की कथा को विस्तार पूर्वक श्रोताओं को सुनाया। श्रोता आनंदपूर्वक कथा का श्रवण करते हुए तालियां बजाते रहे।

शिव कथा से हमें प्रेम और समर्पण की महत्वपूर्ण सीख मिलती है और भगवान शिव और माता सती के बीच के दिव्य प्रेम का वर्णन करते हुए अयोध्या धाम से आऐ कथावाचक अनिल शास्त्री ने कही।

सकल सुरन्ह के हृदयँ अस संकर परम उछाहु।”

देवता आपके विवाह का दर्शन करना चाहते हैं। बाबा ने अनुमति दी। सप्तर्षि गए हिमाचल जी के यहां। सभी देवताओं ने विवाह की तैयारी की। यहां गोस्वामी जी कहते हैं “लगे सँवारन सकल सुर बाहन बिबिध बिमान।”

सभी बाबा के गान बाबा को संवारने लगे और गोस्वामी जी कहते हैं।

* सिवहि संभु गन करहिं सिंगारा। जटा मुकुट अहि मौरु सँवारा॥
कुंडल कंकन पहिरे ब्याला। तन बिभूति पट केहरि छाला॥

* ससि ललाट सुंदर सिर गंगा। नयन तीनि उपबीत भुजंगा॥
गरल कंठ उर नर सिर माला। असिव बेष सिवधाम कृपाला॥

* कर त्रिसूल अरु डमरु बिराजा। चले बसहँ चढ़ि बाजहिं बाजा॥
देखि सिवहि सुरत्रिय मुसुकाहीं। बर लायक दुलहिनि जग नाहीं॥

एक गान ने बाबा को की जटाओं का मुकुट बनाया। तभी दूसरे ने सांपों का मोर बनाकर बाबा को पहना दिया। सांपों के कंगन कुंडल बनाकर गन ने बाबा का श्रृंगार किया। बाबा नंदी पर बैठे बारात सजी और गानों के द्वारा जय जयकार हुई। जब देवगणों ने बाबा का स्वरूप देखा तो भगवान विष्णु ने कहा बर अनुहारि बरात न भाई।
सभी देवगन बाबा से पहले चल दिए। बाबा ने कहा सभी भूत प्रेत को बुलाओ तभी। भृंगी ने अपना बिगुल बजाया तो चारों दिशाओं से हर हर महादेव हर हर महादेव की आवाज आने लगी और यह जय घोष भूतों द्वारा हुआ । और सभी भूत कैसे आए “सिव अनुसासन सुनि सब आए। प्रभु पद जलज सीस तिन्ह नाए॥” ऐसे ऐसे भूत आए जिनका वर्णन नहीं किया जा सकता है। तभी देवताओं को आवाज आई।
हर हर महादेव की जब जब देवताओं ने भूतों को बारात में नाचते हुए देखा तो सभी आश्चर्यचकित हो गए। दो सहित जब बाबा की बारात नगर में पहुंचे। तो सारे हाथी घोड़े आगवान भाग गए सभी ने अपने दरवाजे बंद कर दिए। बाबा द्वारा पूजन के लिए पहुंचे। तो मैंना मैया आई जैसे ही बाबा का भयंकर रूप है मैंना जी ने देखा विलाप करती हुई अंदर चली गई।
तभी नारद जी ने रानी मैनावती और हिमाचल जी को पार्वती जी का पुनर्जन्म याद कराया। अनेकों प्रकार से समझाया बाबा महादेव ने पीतांबर वस्त्र धारण किए। मंडप में पूजन हुआ विवाह संपन्न हुआ। और सभी देवताओं ने बाबा की जय जयकार करते हुए कहा पार्वती पति महादेव की जय। यह सारी कथा श्रीयाज्ञवल्क्य जी ने भारद्वाज जी को कहि।
माता सती के पिता दक्ष ने उनके पति भगवान शिव के प्रति अपमान किया और उन्हें यज्ञ से वंचित किया। माता सती ने अपने पिता के घर के उत्सव में भाग लेने की इच्छा जताई, लेकिन उनके पिता ने इसे अस्वीकार किया।

माता सती ने अपने पति के अपमान को बर्दाश्त नहीं किया और अपने शरीर को आग में समर्पित किया। भगवान शिव ने इसके बाद माता सती की आत्मा को पुनर्जीवित किया और माता पार्वती के रूप में विवाह किया। भगवान शिव का माता सती के प्रति अत्यंत प्रेम था। वे उन्हें अपनी अर्धांगिनी मानते थे और माता सती ने जन्म जन्म तक भगवान शिव की अर्धांगिनी रहु।
माता सती की आत्महत्या का मुख्य कारण था उनके पिता दक्ष के द्वारा उनके पति भगवान शिव के अपमान का प्रयास। दक्ष ने एक महायज्ञ का आयोजन किया लेकिन उन्होंने भगवान शिव को निमंत्रित नहीं किया था और उन्हें यज्ञ में अपमानित किया। माता सती ने यज्ञ को देखकर इस अपमान को सहने की कठिनाइयों के बावजूद भगवान शिव की स्तुति की और उनके प्रति अपनी प्रेमभावना प्रकट की। लेकिन जब दक्ष ने उनकी इच्छाओं को असम्मानित नहीं किया, तो माता सती ने अपने शरीर को आग में दिया, जिससे वे अपने प्रेमभक्त भगवान शिव के साथ एक हो गईं।
व्यवस्थापक संदीप सिंह राजा बाबू तिवारी सीताराम सिंह और श्री राम सिंह ने बताया कि 25 में से शुरू होकर 2 मई तक चलेगा और 3 मइ को विशाल भंडारा के साथ संपन्न होगा।f


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