जनपद के कृषि अपशिष्ट से बनाई जाए जैव ऊर्जा – डीएम
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🟢 जैव ऊर्जा नीति-2022 पर जिलाधिकारी ने की बैठक
गोण्डा जिले के नगरीय ठोस अपशिष्ट, पशुधन अपशिष्ट, कृषि उपज मंडियों के अपशिष्ट तथा चीनी मिलों के अपशिष्ट को रिसाइकिल कर ऊर्जा में बदलने हेतु सरकार द्वारा बनाई गई जैव ऊर्जा नीति-2022 बनाई गयी है। इस नीति को जनपद में सकुशल क्रियान्वयन हेतु गठित जिला स्तरीय समिति की पहली बैठक गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आहूत की गई। बैठक की अध्यक्षता कर रहे जिलाधिकारी डॉ उज्जवल कुमार ने कहा कि इस नीति के माध्यम से कृषि अपशिष्ट को प्लांट लगाकर बायो सीएनजी, बायोकोल, सीबीजी, बायो पैलेट आदि जैव ऊर्जा में बदला जाए। इसके लिए जो उद्यमी बायो प्लांट लगाना चाहता है उन्हें सब्सिडी व हर संभव मदद प्रदान की जाए। अपशिष्ट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो इसके लिए हर ब्लॉक में एफपीओ बनाया जाए। इसके माध्यम से रॉ मैटेरियल प्लांट को उपलब्ध कराया जाए। बायो सीएनजी, बायोकोल, सीबीजी, बायो पैलेट को प्रोत्साहित किया जाए जिससे कि कोयले पर निर्भरता कम हो सके। उन्होंने कृषि विभाग एवं नेडा विभाग को निर्देश दिए कि वह इस योजना का अधिक से अधिक प्रचार प्रसार कर जनपद में प्लांट स्थापित करवाएं, जो उद्यमी इसके लिए इच्छुक हो उन्हें इस नीति के बारे में पूरी जानकारी दी जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि इस नीति के द्वारा कृषि अपशिष्ट को जलाने से होने वाली पर्यावरण क्षति तथा मृदा उर्वरता के ह्रास में कमी आएगी, साथ ही किसानों की अतिरिक्त आय में वृद्धि होगी, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।बैठक में मुख्य विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, उप कृषि निदेशक एवं अन्य संबंधित अधिकारी गण उपस्थित रहे।
