गोंडा : श्रीकृष्ण का जन्म मनुष्य जीवन के उद्धार के लिए हुआ है — डॉ ऊधौ
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गोंडा ( युगनव टाइम्स लाइव ) श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण मनुष्य जीवन को सार्थक बनाती है। जन्म तो हर प्राणी एवं मनुष्य लेता है लेकिन उसे अपने जीवन का अर्थ बोध नहीं होता है। बाल्यावस्था से लेकर मृत्यु तक वह सांसारिक गतिविधियों में ही लिप्त होकर इस अमूल्य जीवन को नश्वर बना देता है। श्रीमद् भागवत ऐसी कथा है जो जीवन के उद्देश्य एवं दिशा को दर्शाती है। इसलिए जहां भी भागवत होती है इसे सुनने मात्र से वहां का संपूर्ण क्षेत्र दुष्ट प्रवृत्तियों से खत्म होकर सकारात्मक उर्जा से सशक्त हो जाता है। यह बात ग्राम पंचायत गिरधरपुर नान भैय्या पांडेय के यहां चल रही भागवत कथा के पांचवें दिन शनिवार को व्यासपीठ पर विराजमान कथावाचक डॉक्टर स्वामी ऊधौ शरण जी महाराज ने मुख जजमान राम नवल पांडेय सह धर्मपत्नी श्रीमती पताला देवी सहित श्रद्धालुओं को प्रभु के अमृत कथा का रसपान कराते हुए कही।
भाजपा जिला कार्यसमिति सदस्य घनश्याम जायसवाल अयोध्या धाम से पधारे संत श्री डॉक्टर ऊधो शरण महाराज जी को अंग वस्त्र भेंट कर उनका स्वागत अभिनंदन किया। घनश्याम जायसवाल ने कहा कि जब प्रभु की असीम अनुकंपा होती है तब श्री हरि कथा को सुनने का अवसर मिलता है।
अयोध्या धाम से पधारे संत डॉक्टर स्वामी ऊधो शरण जी महाराज ने प्रभु के प्रसंग का रसपान कराते हुए कहा कि श्रीकृष्ण का जन्म मनुष्य जीवन के उद्धार के लिए हुआ है। कंस ने उनके जन्म लेने को रोकने के लिए अथक प्रयास किए लेकिन सफल नहीं हो पाया। अंत मेंं अपने पापों का घड़ा भरने पर श्रीकृष्ण के हाथों मरकर मोक्ष की प्राप्ति की। उन्होंने बताया मनुष्य जीवन सबसे उत्तम माना जाता है। इसी योनी में भगवान भी जन्म लेना चाहते हैं। जिससे वे अपने आराध्य ईश्वर की भक्ति कर सके। श्रीकृष्ण ने भागवत गीता के माध्यम से बुराई व सदाचार के बीच अंतर बताया। ईश्वर को धन दौलत व यज्ञों से कोई सरोकार नहीं है। वह तो केवल स्वच्छ मन से की गई आराधना के अधीन होता है। जात, पात व धर्म नहीं जानते। वह तो भक्ति मात्र के प्रेम को जानते है।
डॉक्टर ऊधो शरण महाराज ने प्रवचन के दौरान हर प्रकार के युगों से श्रद्धालुओं को अवगत कराया। समय-समय पर भगवान को भी अपने भक्त की भक्ति के आगे झुककर सहायता के लिए आना पड़ा है। मित्रता, सदाचार, गुण, अवगुण, द्वेष सभी प्रकार के भावों को व्यक्त किया है। जब तक हम किसी चीज के महत्व को नहीं जानते तब तक उसके प्रति मन में श्रद्धा नहीं जगती। कहा कि जब तक भक्तों का मन पवित्र नहीं होगा तब तक भागवत कथा श्रवण का लाभ नहीं मिल सकता। परम सौभाग्य प्राप्त होता है तब प्रभु की कथा क्षेत्रों में शुरू होती है इसलिए सभी श्रद्धालुओं को सच्चे मन से प्रभु का स्मरण करते हुए कथा सुननी चाहिए जिससे जीवन में खुशहाली आए।
