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शादी का कार्ड या साइबर ठगी का नया जुगाड़ क्षेत्राधिकारी ने किया साइबर क्राइम से आगाह

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शादी का कार्ड या साइबर ठगी का नया जुगाड़ ?

नवाबगंज गोण्डा  नवाबगंज थाने मे पुलिस क्षेत्राधिकारी यू पी सिंह थानाध्यक्ष अभय सिंह समाधान दिवस के बाद थाने मे मौजूद राजस्व कर्मियों से कहा कि  पुराने जमाने में लोग शादी का कार्ड लेकर घर-घर जाते थे। हल्दी-कुमकुम, मिठाई, और ढेरों दुआएं साथ लेकर। लेकिन साहब, ये जमाना “डिजिटल इंडिया” का है। अब न तो किसी के पास घर जाने की फुर्सत है, न कार्ड छापने का झंझट। वॉट्सऐप जिंदाबाद! एक क्लिक में 500 लोगों को निमंत्रण भेज दो, और काम खत्म। पर भाई, जब सब कुछ डिजिटल हो रहा है तो ठग क्यों पीछे रहें? उन्होंने भी अपने “व्यवसाय” को अपग्रेड कर लिया है।

अब आपको वॉट्सऐप पर शादी का कार्ड मिलेगा। बड़ा ही हाई-फाई, एनिमेशन वाला, म्यूजिक वाला। दिल खुश हो जाएगा। आप सोचेंगे, “वाह, फलाने भाई ने कितना बढ़िया कार्ड भेजा है! चलो, एक बार क्लिक करके देखूं कि शादी की जगह और टाइमिंग क्या है।” और बस, यहीं आप “शादी में जरूर आना” के चक्कर में लुट जाते हैं।

आप जैसे ही उस सुंदर, सुशील, और “संस्कारी” कार्ड पर क्लिक करते हैं, आपके फोन में एक “एपीके” (APK) नाम का गुप्त मेहमान घुस आता है। ये मेहमान बड़ा शातिर है। ये न तो नाश्ता मांगता है, न चाय-पानी। बस चुपचाप आपके फोन के सारे राज चुराना शुरू कर देता है। आपका बैंक बैलेंस, ओटीपी, पासवर्ड… सब कुछ। और आप बेचारे, “वाह-वाह” करते रह जाते हैं।

ये ठग भी गजब के मनोवैज्ञानिक होते हैं। शादी का कार्ड क्यों चुना? क्योंकि ये एक ऐसा इमोशनल हथियार है, जिस पर कोई शक नहीं करता। आप सोचते हैं, “अरे! ये तो किसी अपने की शादी का कार्ड है। इसमें क्या खतरा हो सकता है?” और आपकी यही मासूमियत आपकी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है।

अब तो लोग “साइबर सुरक्षा” की बात करने लगे हैं। पुलिस ने भी एडवाइजरी जारी कर दी है। “अनजान नंबर से आए शादी कार्ड को न खोलें,” “एपीके फाइल डाउनलोड न करें।” लेकिन सवाल ये है कि जब तक हम खुद “डिजिटल लिटरेट” नहीं होंगे, तब तक ये ठगी चलती रहेगी।

आजकल तो ये हाल है कि वॉट्सऐप पर कोई “शगुन” का लिफाफा भी भेज दे, तो पहले चेक करो कि कहीं ये भी कोई “साइबर स्कैम” तो नहीं!

तो अगली बार अगर कोई अनजान नंबर से आपको शादी का कार्ड भेजे, तो उसके इरादों पर शक करें। हो सकता है वो आपको ब्याह की दावत नहीं, बल्कि कंगाल होने का न्योता दे रहा हो। और हां, अगर फिर भी कोई कार्ड आए तो कम से कम इतना तो कह ही दें, “माफ़ कीजिएगा, अब हम केवल ‘हार्ड कॉपी’ वाले कार्ड्स पर ही भरोसा करते हैं।” इस अवसर पर राजस्व निरीक्षक परशुराम मिश्रा जावेद अहमद राहुल अग्रहरी दीपक कुमार दिनेश यादव सियाराम विनीत विपिन सिंह सहित थाने के कई उपनिरीक्षक क्षेत्र के तमाम नागरिक उपस्थित रहे |

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