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पूर्व सांसद व पूर्व कृषि मंत्री आनंद सिंह का निधन, राजनीतिक जीवन के एक युग का अंत

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संजय प्रजापति
मनकापुर गोंडा, उत्तर प्रदेश की राजनीति के एक मजबूत स्तंभ और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद सिंह का रविवार देर रात लखनऊ में निधन हो गया। 85 वर्षीय आनंद सिंह, जिन्हें उनके समर्थक ‘अन्नू भैया’, ‘यूपी टाइगर’ और ‘मनकापुर के राजा’ के नाम से भी जानते थे, ने रात में अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह के पिता थे।जैसे ही उनके निधन की खबर गोंडा, मनकापुर और आसपास के क्षेत्रों में पहुंची, शोक की लहर दौड़ गई। जनप्रतिनिधियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया।
राजनीतिक करियर: एक शक्तिशाली विरासत
आनंद सिंह 1971 के लोकसभा चुनाव के दौरान वे तब चर्चा में आए जब उन्होंने गोंडा संसदीय सीट से चुनाव लड़ा और अपने चाचा देवेंद्र प्रताप सिंह उर्फ लल्लन साहब को हराकर जीत हासिल की। इस चुनावी लड़ाई ने उनके राजनीतिक जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया, जिसने उन्हें कांग्रेस पार्टी के भीतर एक मजबूत ताकत के रूप में स्थापित कर दिया। ने राजनीति में अपने प्रभावशाली व्यक्तित्व और कुशल नेतृत्व से चार बार गोंडा लोकसभा सीट से संसद में प्रतिनिधित्व किया। वे 1971, 1980, 1984 और 1989 में कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुने गए। पूर्वांचल की राजनीति में उनका दबदबा इतना था कि कहा जाता है — कांग्रेस उन्हें सिर्फ चुनाव चिन्ह देती थी, प्रत्याशी वे खुद तय करते थे। उनके निवास मनकापुर कोठी को उस दौर में पूर्वांचल की राजनीति की धुरी माना जाता था। यहीं से नेताओं की कतार लगती थी — कोई ब्लॉक प्रमुख, कोई जिला पंचायत अध्यक्ष, कोई विधायक और कोई सांसद बनने की आस में लगा रहता था ।
विधानसभा राजनीति और मंत्री पद
गोण्डाक्षेत्र से 5वीं , 7वीं , 8वीं और 9वीं लोकसभा के लिए संसद सदस्य चुने गए थे । [ 1 ] वे 2012 से 2017 तक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार के लिए विधान सभा के सदस्य और कृषि मंत्री भी रहे । आनंद सिंह ने संसदीय राजनीति से संन्यास के बाद 2012 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर गौरा विधानसभा सीट से चुनाव जीता और तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार में कृषि मंत्री बने। किसानों और ग्रामीण क्षेत्र के मुद्दों को लेकर उनकी स्पष्ट सोच और आवाज हमेशा प्रभावशाली रही। 2017 के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली और सार्वजनिक जीवन में कम ही दिखाई देते थे।
राजनीति में उतार-चढ़ाव का दौर
1971, 1980, 1984, 1989: कांग्रेस से सांसद निर्वाचित
1991: राम लहर में बृजभूषण शरण सिंह से हार
1996: उनकी पत्नी केतकी देवी सिंह ने भाजपा से चुनाव जीतकर उन्हें (तब एसपी प्रत्याशी) हराया
इसके बाद उन्होंने लोकसभा चुनावों से दूरी बना ली, हालांकि विधानसभा चुनावों में सक्रिय रहे

पारिवारिक और राजनीतिक उत्तराधिकारी
उनके पुत्र कीर्तिवर्धन सिंह वर्तमान में गोंडा से भाजपा सांसद हैं और केंद्र सरकार में विदेश राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया है और जनसेवा में लगातार सक्रिय हैं।
पूर्व मंत्री के करीबी और वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता केबी सिंह ने बताया कि आनंद सिंह एक ऐसे नेता थे जो जनता के नेता भी थे और नेताओं के मार्गदर्शक भी। उनका जीवन संघर्ष, सेवा और नेतृत्व का प्रतीक रहा।

शोक संवेदनाएं और श्रद्धांजलि
उनके निधन पर अनेक मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक हस्तियों ने शोक व्यक्त किया। गोंडा में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया गया है। शोक सभा मे अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद विधायक प्रभात वर्मा , प्रेम नरायण , विनय द्विवेदी रमापति शाष्त्री महेश नरायण पूर्व विधायक राम प्रताप योगेश प्रताप शामिल रहे
आनंद सिंह का निधन केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि एक युग का अंत है — वह युग जिसमें राजनीति जनसेवा का पर्याय थी ।

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