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समाधान दिवस: जनसमस्याओं के निवारण का मंच या मात्र औपचारिकता ?

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समाधान दिवस: जनसमस्याओं के निवारण का मंच या मात्र औपचारिकता ?

नवाबगंज,  गोण्डा : प्रत्येक माह के प्रथम और तीसरे शनिवार को आयोजित होने वाला समाधान दिवस, जिसका उद्देश्य आम जनता की शिकायतों और समस्याओं का त्वरित और प्रभावी निवारण करना है, क्या वास्तव में लोगों की उम्मीदों पर खरा उतर रहा है? या यह मात्र एक औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह गया है?

शनिवार को नवाबगंज थाने में आयोजित समाधान दिवस में कई फरियादी अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे। भूमि विवाद, अतिक्रमण, और पुलिस से संबंधित मामलों को लेकर लोगों ने अपनी बात रखी। हालांकि, पिछली घटनाओं को देखते हुए, यह सवाल उठना लाजमी है कि इन शिकायतों का वास्तव में समाधान हो पाएगा या नहीं।

यह सर्वविदित है कि समाधान दिवस का मुख्य उद्देश्य विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों को एक ही स्थान पर लाकर जनसुनवाई करना और मौके पर ही समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना है। इसमें राजस्व, पुलिस, और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होते हैं। लेकिन, अक्सर देखा गया है कि राजस्व कर्मियों पुलिस के आलावा किसी अन्य विभाग के कर्मचारी नहीं दिखाई पड़ते है कि कई महत्वपूर्ण अधिकारी इस दिवस से अनुपस्थित रहते हैं, जिससे फरियादियों को निराशा हाथ लगती है। ब्लाक कर्मी ,स्वास्थ कर्मी सब नदारत रहते है जन्म , मृत्यु , पेंशन, शिक्षा आदि को कोई नहीं ध्यान देता | स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार शिकायतें दर्ज कराने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती और उन्हें बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। ऐसे में, समाधान दिवस की सार्थकता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। हालांकि, कुछ मामलों में त्वरित कार्रवाई भी देखने को मिलती है। आज के समाधान दिवस में, मात्र 9 शिकायत आई वह भी चकमार्ग पैमाइस , अवैध कब्जा बस यही शिकायत होती नजर आई आलम यह है कई लेखापाल भी अब समाधान दिवस से दूर रहते नजर आते है | यह जरूरी है कि समाधान दिवस को मात्र एक रस्म अदायगी बनकर न रहने दिया जाए। अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहना होगा। नियमित उपस्थिति और प्रभावी कार्रवाई ही इस महत्वपूर्ण पहल को सफल बना सकती है। प्रशासन को चाहिए कि वह समाधान दिवस की नियमित निगरानी करे और यह सुनिश्चित करे कि दर्ज की गई प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध निस्तारण हो। तभी आम आदमी का विश्वास इस व्यवस्था में बना रहेगा और समाधान दिवस वास्तव में ‘समाधान’ का दिवस बन पाएगा।

रस्म आदायगी दिवस: औपचारिकता या सार्थक पहल?

‘रस्म आदायगी दिवस’ एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल अक्सर उन आयोजनों या पहलों के लिए किया जाता है जो सतही तौर पर तो आयोजित किए जाते हैं, लेकिन उनका वास्तविक उद्देश्य या प्रभाव सीमित होता है। ऐसे दिवस अक्सर औपचारिकता मात्र बनकर रह जाते हैं, जहां कुछ निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं,  लेकिन जमीनी स्तर पर कोई खास नहीं  लेकिन, अगर इन आयोजनों के बाद उस मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, या लोगों के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आता, तो ये दिवस मात्र ‘रस्म आदायगी’ बनकर रह जाते हैं। यह महत्वपूर्ण है कि हम ऐसे ‘रस्म आदायगी दिवसों’ के पीछे के इरादे को समझें। क्या इनका आयोजन वास्तव में किसी समस्या का समाधान निकालने या किसी सकारात्मक बदलाव को लाने के लिए किया जा रहा है? या ये सिर्फ जनसंपर्क या राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने का एक तरीका हैं?

अगर किसी दिवस का उद्देश्य सार्थक है, तो यह जरूरी है कि उसे केवल औपचारिकता तक सीमित न रखा जाए। उस दिन की गतिविधियों को एक व्यापक रणनीति का हिस्सा होना चाहिए, जिसमें दीर्घकालिक लक्ष्य और उन्हें प्राप्त करने के लिए ठोस कदम शामिल हों।

जनता के तौर पर भी हमारी यह जिम्मेदारी है कि हम ऐसे आयोजनों का मूल्यांकन करें और सवाल पूछें कि इनसे वास्तव में क्या हासिल हो रहा है। तभी हम यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि हमारे समय और संसाधनों का सही इस्तेमाल हो रहा है और ‘दिवस’ वास्तव में बदलाव के वाहक बन रहे हैं, न कि सिर्फ ‘रस्म आदायगी’ के अवसर। आज समाधान दिवस अपर पुलिस अधीक्षक राधेश्याम राय सी ओ नवीन के साथ थानाध्यक्ष अभय सिंह राजस्व निरीक्षक परशुराम मिश्रा , नंदलाल लेखपाल ओम प्रकाश वर्मा , राहुल गुप्ता ,गौरव गांधी, दीपक कुमार ,संध्या शुक्ल , कृष्णा कुमारी , आलोक श्रीवास्तव , सहित थाने के कई लोग उपस्थित रहे |

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