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टाण्डा तहसील में वकीलों के द्वारा एक अनोखा प्रदर्शन चर्चा का विषय, घूस का रेट फिक्स करने की मांग को लेकर वकील सड़क पर

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प्रमोद कुमार पांडेय ( युगनव टाइम्स लाइव )

टाण्डा ( अम्बेडकर नगर ) जिले के टाण्डा तहसील में वकीलों के द्वारा एक अनोखा प्रदर्शन चर्चा का विषय बना हुआ है. यहां पर वकीलों ने घूस का रेट फिक्स करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया है. तहसील के हर कार्य का रेट निर्धारण करने और उसकी दर सूची (लिस्ट) जारी करने को लेकर अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा. वकीलों ने कहा है कि कोई भी काम बिना रिश्‍वत दिए पूरा नहीं होता है, हर बात के लिए मनमानी रकम मांगी जाती है. छोटे-छोटे कामों के लिए भी कर्मचारी पैसे लेने के बाद ही काम करते हैं, ऐसे में गरीब आदमी हो या किसान उसे समस्‍या होती है. वहीं वकीलों को भी अपने काम करवाने में दिक्‍कत आ रही है. अगर रेट लिस्‍ट बन जाएगी तो तहसील में आसानी से काम करा सकेंगे.

वकीलों के इस प्रदर्शन ने तहसील कार्यालय में चल रही रिश्‍वतखोरी की पोल खोल कर रख दी है. किस मामले में कितनी धनराशि घूस में देना है, इस निश्चित करने के लिए अधिवक्ताओं ने तहसीलदार को करारा पत्र भी लिखा है. हालांकि इस मामले में एसडीएम ने घूस की बात को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्‍होंने कहा कि ऐसा कभी नहीं हो सकता है. कोई भी सरकारी काम के लिए यदि घूस मांगता है तो उस पर एक्‍शन लिया जाएगा. उन्‍होंने कहा कि रिश्‍वत मांगने या लेने वाले को रंगे हाथों पकड़वा देना चाहिएल
आपको जो धन दिया जाता है वह आपकी अपेक्षा से कम होता है
इधर, वकीलों ने घूस की मांग से परेशान होकर प्रदर्शन किया है और घूस की राशि निश्चित करने की मांग कर डाली है. घूस की राशि निश्चित करने के लिए अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में नारेबाजी भी की. टांडा तहसीलदार को भेजे गए पत्र में अधिवक्ताओं ने लिखा है कि वादकारियों के कार्यों में प्रमाणित घूस दर न होने से आप को अपेक्षित धन उपलब्ध कराने समस्या हो रही है. जो धन दिया जाता वह आपकी अपेक्षा से कम होता है जिससे आदेश नहीं हो पाता.

प्रमाणित घूस दर का प्रकाशन हो
पूर्व में प्रचलित घूस की धनराशि इस समय बढ़ गई है. प्रत्येक मामले का प्रमाणित घूस दर प्रकाशित कर दिया जाय. जिससे कार्य सम्पादन आसान हो जाय. अधिवक्ताओं के इस प्रदर्शन को लेकर एसडीएम टांडा डॉ शशिशेखर का कहना है यह बार का प्रदर्शन नहीं था. कुछ अधिवक्ताओं की किसी बात को लेकर नाराजगी थी. मामला समाप्त कर दिया गया है.

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