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दो घरों की रौनक है बेटियां: स्वामी चिन्मयानंद

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मुंशी प्रेमचंद्र का नाटक तेतर का मंचन कर कलाकारों ने बेटियों पर गरभ से लेकर ससुराल तक हो रहे अत्याचार को रोकने के लिए जनता को किया जागरूक

  • रिपोर्ट रियाजुद्दीन

नवाबगंज/ गोंडा 

लोक कल्याण एवं विकास समिति गोंडा द्वारा मुंशी प्रेमचंद के नाटक तेंतर का मंचन शिवदयाल गंज स्थित कटरा कुटी धाम मंदिर पर किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पीठाधीश्वर कटरा कुटी धाम स्वामी चिन्मयानंद जी ने दीप प्रज्वलित मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। तत्पश्चात कलाकारों ने नाटक चित्र का मंचन किया। जिसमें गर्व से लेकर ससुराल तक बेटियों पर हो रहे अत्याचार को रोकने के लिए नाटक के माध्यम से जनता को जागरुक किया गया। तेंतर के संबंध में पूर्वजों से सुना था कि तेंतर बच्चे बहुत ही खुराफाती, झगड़ालू, गुस्से वाले और अशुभ होते है। उनके वजह से घर में हमेशा अशांति और लड़ाई-झगड़े का माहौल बना रहता है। क्योंकि मुंशी प्रेमचंद के “तेंतर” नामक पुस्तक में लेखक ने तीन लड़कों के बाद जन्म लेने वाली लड़की का उल्लेख किया है। जिसे पहले से ही हमारे पुरुष प्रधान समाज में एक आफ़त व चिंता के रूप में देखा जाता है। और कही न कही यह धारणा आज भी हमारे समाज से पूरी तरह से खत्म नहीं हो पायी है क्योंकि हमने भले ही बाहरी तौर पर बड़ी – बड़ी बाते व भाषणबाजी करते हुये बहुत से लोगों को देखा होगा। पर अंदर से असलियत और कुछ ही होती है ठीक वैसे ही जैसे एक रंगा सियार। अगर हम गौर फरमाए तो पाएँगे कि स्वतन्त्रता के बाद से भारत में स्त्रियों को लेकर काफी हद तक लोगों की धारणा बदली है और इन सभी विपरीत समस्याओं के बावजूद आज स्थितियाँ काफी बदली है पर अभी भी रही-सही कसर बची है। आज के वैज्ञानिक युग में हम अन्तरिक्ष तक भले पहुँच गए है, पर आज भी जमीन पर बहुत से ऐसे जगह है जहां पर तेंतर, नर-बलि, तंत्र-मंत्र आदि बहुत सारे अंधविश्वास लोगों के मन-मस्तिष्क में अपनी पैठ बनाए हुये है। कहने का मतलब यह है कि प्रेमचंद ने अपने समय के समाज में जो कुछ भी देखा उसका हूबहू सजीव चित्रण भी किया जो आज के समय में हमें रास्ता दिखाने का भी काम करता है। लड़कियों के जन्म को लेकर बनी हुयी रूढ़ एकांकी मानसिकता और घोर निराशा व चिंता को देखते हुये एक लेखक ने सभी को आगाह करने का प्रयास किया है। इस मौके पर उपस्थित कार्यक्रम अध्यक्ष अशोक कुमार श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष एस के श्रीवास्तव, अजीत प्रताप सिंह, मुकेश श्रीवास्तव, अदा फाउंडेशन नाट्य तिर्ररेमनोरमा इटियाथोक, रामभवन संचालन लीडर, मनीराम तिवारी, कल्याण, मान्या तिवारी, कमलेश, रिंकू दूबे, अनुरुद्ध, सरयू घाट चौकी प्रभारी अभिषेक पांडे अरुण कुमार सिंह गौरीशंकर गुप्ता, संदीप कुमार यादव, काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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