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October 3, 2026

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दो दिवसीय छंद कार्यशाला का हुआ समापन

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गोण्डा /श्री लालबहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज गोण्डा में *दो दिवसीय छन्द कार्यशाला* का समापन वैदिक मंगलाचरण एवं अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्चन के साथ सम्पन्न हुआ। *प्रो.एस.बी.सिंह बघेल* ने कहा कि संस्कृत और पालि दोनों ही भाषाएं बहुत ही प्राचीन हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में संस्कृत विषय का चयन करने से सफलता का प्रतिशत बढ़ जाता है‌। संस्कृत के छात्रों और शिक्षकों का यह उत्तरदायित्व है कि वह अपनी संस्कृत भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण हेतु सतत प्रयास करते रहने चाहिए।
कार्यक्रम की *अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रो.रवीन्द्र कुमार* ने कहा कि संस्कृत भाषा में कम शब्दों में बहुत सी बातों को व्यक्त व प्रकट करने की सामर्थ्य होती है। दो दिवसीय कार्यशाला में बच्चों के छन्द गायन को देखकर हृदय भाव विभोर हो गया।संस्कृत भाषा के छात्र बहुत ही संघर्षशील व विनम्र होते हैं। मेरी यह अभिलाषा है ऐसी कार्यशालाएं विभिन्न विभागों पर होती रहनी चाहिए।भूगोल विभागाध्यक्ष *डाॅ.रंजन शर्मा* ने छन्द कार्यशाला की उपयोगिता के साथ कार्यशाला पर महत्व पर प्रकाश डाला। संस्कृत भाषा का भविष्य बहुत ही उज्ज्वल है। संस्कृत भाषा अन्य भाषाओं की अपेक्षा भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में बहुत अधिक योगदान देती है। *आई क्यू ए.सी.के अध्यक्ष प्रो.रामसमुझ सिंह* ने कहा कि छन्द कार्यशाला के बहुत ही दूरगामी परिणामी होंगे तथा इस तरह की शैक्षणिक गतिविधि महाविद्यालय के विकास में योगदान करती है।
*प्रो.श्रीनिवास राव* ने कहा कि संस्कृत भाषा में छन्द गायन का कौशल बहुत ही उपयोगी होता है‌। *प्रो.राजीव अग्रवाल* ने कहा कि संस्कृत भाषा पुनः अपने गौरव को प्राप्त कर सकेगी। संस्कृत भाषा में जीवन प्रबन्धन का भी महत्वपूर्ण ज्ञान भण्डार है। *डा.वन्दना भारतीय* ने कहा कि इस कार्यशाला में छात्रों ने बहुत ही तन्मयता के साथ प्रतिभाग किया है। लेकिन इस कार्यशाला से प्राप्त ज्ञान को छात्र जितना ही संरक्षित और विकसित कर सकेंगे यह कार्यशाला उतना ही सफल होगी। कार्यशाला का वृत्त निवेदन करते हुए संस्कृत विभागाध्यक्ष *प्रो.मंशाराम वर्मा* ने कहा कि इस दो दिवसीय कार्यशाला में 50 से अधिक छात्र-छात्राओं तथा 20 शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। उन्होंने मंचस्थ अतिथियों के प्रति आभार भी प्रकट किया। प्रशिक्षक *जगदम्बा प्रसाद सिंह* ने छन्दों का परिचय कराते हुए छन्द गायन की बारीकियों को बहुत सरलतम व प्रभावी ढंग से समझाया‌। कार्यशाला के प्रतिभागियों में सच्ची सिंह,रत्नेश तिवारी,शिवांगी दुबे, मधु दुबे ने छन्द गायन की सुमधुर प्रस्तुति दी। इस अवसर पर *डा.अमित वर्मा, डा.अवधेश वर्मा, श्री श्रवण कुमार* आदि आचार्यगण तथा नन्दिनी मिश्रा,रुक्साना, विद्यांशी, विवेक गुप्ता, आशुतोष मिश्र, अन्नपूर्णा, अनुराग शुक्ला आदि छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।


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