अठारह की उम्र तक मुफ्त शिक्षा से 2030 तक हो सकता है बाल विवाह का खात्मा,बाल विवाह मुक्त गोंडा अभियान के तहत रोके गए 229 बाल विवाह
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मोहम्मद सुलेमान /राकेश कुमार सिंह
गोण्डा अठारह वर्ष की उम्र तक सभी बच्चों को अनिवार्य और मुफ्त शिक्षा 2030 तक देश से बाल विवाह के खात्मे में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। देश में बाल विवाह के खिलाफ जारी लड़ाई में परिवर्तनकारी साबित हो सकने वाला यह अहम निष्कर्ष देश में 2030 तक बाल विवाह के खात्मे के लिए अभियान चला रहे 160 गैरसरकारी संगठनों के गठबंधन बाल विवाह मुक्त भारत अभियान द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जारी एक शोधपत्र “एजुकेट टू इंड चाइल्ड मैरिज : एक्सप्लोरिंग लिंकेजेज एंड रोल ऑफ एजुकेशन इन एलिवेटिंग एज ऐट मैरिज फॉर गर्ल्स इन इंडिया” में उजागर हुआ है। शोधपत्र के अनुसार, भारत बाल विवाह के 2030 तक खात्मे की राह में अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।
अध्ययन की अगुआई कर रहे पुरुजीत प्रहराज ने कहा, “यद्यपि सरकारे बाल विवाह के खात्मे के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति से काम कर रही हैं, फिर भी यदि शिक्षा का अधिकार कानून में बदलाव कर 18 वर्ष तक शिक्षा अनिवार्य तथा निशुल्क कर दी जाए तो बेहतर होगा।
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान 2030 तक इस सामाजिक बुराई के खात्मे के लिए बाल विवाह की ऊंची दर वाले 300 से ज्यादा जिलों में इसके खिलाफ जमीनी अभियान चला रहे 160 गैरसरकारी संगठनों का गठबंधन है। इस गठबंधन ने पिछले छह महीनों के दौरान ही देश में 50,000 से ज्यादा बाल विवाह रोके हैं जबकि 10,000 से ज्यादा मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।
जनपद गोंडा में इस शोधपत्र के निष्कर्षों को जारी करते हुए बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के सहयोगी संगठन अपराजिता सामाजिक समिति ने कहा कि यद्यपि केंद्र व राज्य सरकार ने इस सामाजिक अपराध के खात्मे में प्रशंसनीय इच्छाशक्ति व गंभीरता दिखाई है, फिर भी बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई को धार देने के लिए कुछ और अहम कदम उठाने की दरकार है।
अपराजिता सामाजिक समिति की निदेशक किरण बैस ने कहा कि फिलहाल राष्ट्र को शिक्षा को शीर्ष प्राथमिकता देने की जरूरत है और हम सरकार से बाल विवाह पर पूरी तरह प्रतिबंध की मांग करते हैं।
शोधपत्र में भारत के विभिन्न हिस्सों से लिए गए आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर महिला साक्षरता दर और बाल विवाह की दर के अंतरसंबंधों को रेखांकित किया गया है। उदाहरण के तौर पर 96 प्रतिशत महिला साक्षरता वाले केरल में बाल विवाह की दर सिर्फ छह प्रतिशत है जबकि राष्ट्रीय औसत 23.3 प्रतिशत है।, इसके उलट बिहार में जहां महिला साक्षरता की दर सिर्फ 61 प्रतिशत है, बाल विवाह की दर 41 प्रतिशत है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (एनएचएफएस 019-21) के अनुसार देश में 20 से 24 आयुवर्ग की 23.3 प्रतिशत लड़कियों का विवाह उनके 18 वर्ष की होने से पहले हो जाता है। जबकि 2011 की जनगणना के के अनुसार हर तीन में से दो लड़कियों का विवाह 15 से 17 की उम्र के बीच हो जाता है। इसका अर्थ यह हुआ कि कुल 52 लाख में से 33 लाख लड़कियों का विवाह उनके 18 वर्ष की होने से पहले ही हो गया।
