चतुर्भुजी नाथ मंदिर पर कथा के अंतिम दिन पूर्णाहुति के उपरांत हुआ विशाल भंडारा
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सुशील कुमार द्विवेदी
खरगूपुर, गोण्डा। चतुर्भुजवा महादेवा कला स्थित चतुर्भुजी नाथ मंदिर में चल रहे शिवमहापुराण में कथाव्यास डॉ रामविलास दास वेदांती नें शिव पार्वती विवाह प्रसंग की कथा सुनाई। कहा की भगवान शिव की बारात पार्वती के मायके पहुंची जहाँ भगवान विष्णु के नेतृत्व में देवतागण चल रहे थे। शिव बारात को देखकर लोग अतिप्रसन्न हुए। पीछे भगवान शंकर बैल पर बैठकर सर्प लपेटकर व भस्म लगाकर चार भुजाएं धारणकर जब पहुंचे तो उनको देखकर भगवती पार्वती की मां मैना बेहोश हो गयीं। उन्होंने नारद मुनि से कहा कि हे मुनीश्वर हमने आपका क्या बिगाड़ा था जो आपने हमारी बेटी को ऐसी शिक्षा दी और बेटी की हजारों वर्षों की तपस्या बर्बाद हो गयी। देवर्षि ने सती के इतिहास को बताने के साथ कहा कि वही सती त्रेतायुग में भगवती पार्वती के रूप में हिमांचल के यहां जन्म ली और इसको समझाने के पश्चात शिव पार्वती का सुन्दर वेद मंत्रों के साथ विवाह सम्पन्न हुआ। अंतिम दिवस की कथा के उपरांत आचार्यों नें पूरे बिधि विधान से यज्ञ हवन कराया। इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें क्षेत्र के हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान वेदांती महाराज नें कथा आयोजकों के मौजूदगी में चतुर्भुजी नाथ मंदिर के भव्य प्रवेश द्वार के निर्माण की आधारशिला रखी। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से संयोजक पीठाधीश्वर संत राघवेश दास वेदांती, भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री वैभव सिंह, भाजपा नेता गुड्डू सिंह, वरिष्ठ भाजपा नेता रामकृपाल शुक्ला आदि मौजूद रहे।
