सीता हरण की सीन को देखकर दर्शक हुए भावुक l
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शिवदयालगंज श्री अवध रामलीला समिति कटरा शिवदयालगंज के तत्वाधान में आयोजित हो रही 12 दिवसीय श्री रामलीला महोत्सव के पांचवें दिन पंचवटी सीता हरण, राम सुग्रीव मित्रता बाली वध की लीला का मंचन किया गया l कार्यक्रम का शुभारंभ राम लक्ष्मण जानकी के दिव्य झांकी सजाकर आरती पूजन से हुई l उसके बाद भगवान राम, सीता और भाई लक्ष्मण के साथ पंचवटी में पहुंचकर कुटी बना कर रहने लगे l कुछ समय पश्चात रावण की बहन सुंदरी पंचवटी में पहुंचती है l और राम लक्ष्मण को देखकर मोहित हो जाती है l और विवाह का प्रस्ताव रखती है l जब दोनों भाई इस प्रस्ताव को ठुकरा देते हैं l तो वह विकराल रूप धारण कर माता सीता को का जाने के लिए झपट्टी है l तभी राम का इशारा पाकर भैया लक्ष्मण सूर्पनखा के नाक और कान काट देते हैं l इस प्रकार वह रोती बिलखती उस दंडक वन के राजा खर और दुसण के पास जाती है l खरदूषण बदला लेने के लिए राम से युद्ध करते हैं l और अपनी 14 सहस्त्र सैनिकों के साथ मारे जाते हैं l यह समाचार लेकर सूर्पनखा जब रोती हुई अपने परम प्रतापी लंका पति रावण के पास जाती है l और सारी घटना की जानकारी देती है l तो रावण क्रोधित होता है l और राम – लक्ष्मण से इसकी बदला लेने हेतु अपने मामा मायावी मारीच को बुलवाता है l और उन्हें स्वर्ण मृग बन राम लक्ष्मण को बहकने के लिए कहता है l इस प्रकार मामा मारिच स्वर्ण मृग बनकर पंचवटी में कुटी के सामने चौकड़ी भरने लगता है l जिसे देख सीता जी मोहित हो जाती हैं l और प्रभु श्री राम से उसको लाने का आग्रह करने लगते हैं l राम जब स्वर्ण मृग के पीछे-पीछे घने जंगल में जाते हैं l और उसका शिकार करते हैं l तो वह राम-राम की आवाज निकालने लगता है l इस प्रकार जानकी जी अधीर होकर भैया लक्ष्मण को प्रभु श्री राम की खोज के लिए भेजते हैं l इधर रावण साधु का रूप धारण कर कुटी में आता है l और माता सीता का हरण कर लेता है l और आकाश मार्ग से लंका की ओर चल देता है l तभी माता जानकी सहायता हैतू पुकारते हैं l अपने कुछ आभूषण अपने पल्लू में बांधकर रास्ते में गिरा देती हैं l यह दृश्य देखकर गिद्धराज जटायु माता जानकी को छुड़ाने हेतु लंका पति रावण से भीषण युद्ध करता है l और रावण को घायल कर देता है l जिससे जटायू मरासन अवस्था में गिर जाते हैं l इधर प्रभु श्री राम और लक्ष्मण कुटिया में पहुंचते हैं l और सीता को न पाकर व्याकुल हो जाते हैं l माता सीता की खोज में निकल पड़ते हैं l आगे खोज करते-करते शबरी को प्रभु श्री राम दर्शन देते हैं l और शबरी के जूठे बेर भी खाए l इस प्रकार सबरी की वर्षों की तपस्या सफल होती है l और वह प्रभु श्री राम को ऋषिमुख पर्वत की ओर जाने का आग्रह करती है l इस प्रकार प्रभु श्री राम ऋषि मुख पर्वत की ओर जाते हैं l जहां हनुमान जी को दर्शन देते हैं l और सुग्रीव से मित्रता होती है l तथा बाल का वध कर सुग्रीव को उनका राज – पाठ , पत्नी वापस दीलाकर भय मुक्त कर देते हैं l लीला में माता जानकी के हरण, खर दूषण, और राम की लड़ाई तथा शबरी के मीठे बेर को खाने का दृश्य दर्शकों को भाव विभोर कर दिया l आज के लीला के मंचन में राम का अभिनय शक्ति गुप्ता , लक्ष्मण अजय गुप्ता, रावण राजेंद्र प्रसाद गुप्ता, खरदूषण रजनीश कमलापुरी, गौरी शंकर गुप्ता, मारीच आशीष कसौधन, सुग्रीव गौरी शंकर गुप्ता, हनुमान अमित कुमार राय, मनोज गुप्ता, आकाश मोदनवाल, गणेश चंद्र गुप्ता, इंद्रपाल, परमानंद, बसंत लाल गुप्ता, आदि ने बहुत ही शानदार अभिनय कर स्रोतों का मनोरंजन करते रहे l संचालन विनोद कुमार गुप्ता एवं निर्देशन कपिल नाथ गुप्ता ने किया l
