वन स्टॉप सेंटर का जनपद न्यायाधीश ने किया निरीक्षण, परखी जमीनी हकीकत
1 min read3,540 views
वन स्टॉप सेंटर का जनपद न्यायाधीश ने किया निरीक्षण, परखी जमीनी हकीकत
गोंडा (युग नव टाइम्स लाइव)
उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार एवं माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गोण्डा श्री ब्रजेन्द्र मणि त्रिपाठी के निर्देशानुसार आज जनपद गोण्डा के वन स्टाप सेन्टर का निरीक्षण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गोण्डा के सचिव श्री नितिन श्रीवास्तव अपर जिला जज/एफटीसी द्वारा किया गया। निरीक्षण के दौरान बाल संरक्षण अधिकारी चन्द्र मोहन वर्मा उपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान प्रभारी अधीक्षिका/केस वर्कर स्वाती पाण्डेय द्वारा अवगत कराया गया कि आज 04 पीड़िताऐं वन स्टाप सेन्टर गोण्डा में संरक्षित हैं, जिनमें से दो पीड़िताऐं बयान हेतु न्यायालय गयी हुईं हैं, शेष 02 पीड़िताऐं वर्तमान में वन स्टाप सेन्टर गोण्डा पर उपस्थित हैं। सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गोण्डा द्वारा वन स्टाप सेन्टर में उपस्थित पीड़िताओं से मुलाकात की गई तथा उनके खान-पान एवं रहन-सहन के बावत उनसे एवं प्रभारी अधीक्षिका/केस वर्कर से पूृछतांछ की गयी। प्रभारी अधीक्षिका/केस वर्कर स्वाती पाण्डेय द्वारा अवगत कराया गया कि वन स्टाप सेन्टर में रहने वाली महिलाओं के खाने-पीने की यहां कोई व्यवस्था नही है, उनके खाना-पानी की व्यवस्था चैकी वन स्टाप सेन्टर की महिला आरक्षी द्वारा अथवा वन स्टाप सेन्टर के कर्मचारियों द्वारा किया जाता है। सचिव द्वारा जब मल्टी पर्पज प्रदीप कुमार से वन स्टाप सेन्टर में रह रही पीड़िताओं के भोजन-पानी के बावत पूंछतांछ की गयी तो उसके द्वारा बताया गया कि जिला प्रोबेशन अधिकारी द्वारा आदेशित किया गया है कि जो पीड़िता डायल 112 की रिपोर्ट पर वन स्टाप सेन्टर में दाखिल करायी जाती हैं, उनके खाने-पीने की व्यवस्था की जायेगी, किन्तु जो पीडिताऐं थाने द्वारा लायी जाती हैं, उनके खाने-पीने की व्यवस्था वह स्वयं करें अथवा वन स्टाप सेन्टर में कार्यरत महिला कर्मचारी द्वारा अपने खर्च पर की जाये। प्रभारी अधीक्षिका/केस वर्कर द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि यहां पर रहने वाली पीड़िताओं एवं कार्यरत महिला कर्मचारीगण के पीने के लिये शुद्ध पेयजल/आर0ओ0 वाटर की कोई व्यवस्था नही है। वन स्टाप सेन्टर से ही बाल संरक्षण अधिकारी चन्द्र मोहन वर्मा को आदेशित किया गया कि फोन के माध्यम से जिला प्रोबेशन अधिकारी गोण्डा से तत्काल बात करायें। सचिव द्वारा फोन के माध्यम से जिला प्रोबेशन अधिकारी गोण्डा को आदेशित किया गया कि वह अतिशीघ्र वन स्टाप सेन्टर में शुद्ध पेयजल/आर0ओ0 वाटर की व्यवस्था सुनिश्चित करें। वन स्टाप सेन्टर में साफ-सफाई नही थी, जिसको सुनिश्चित कराने के बावत बाल संरक्षण अधिकारी चन्द्र मोहन वर्मा को आदेशित किया गया। प्रभारी अधीक्षिका/केस वर्कर द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि वन स्टाप सेन्टर में आने के लिये सामने से कोई रास्ता नही है, मर्चुरी एवं ट्रांसफार्मर से होते हुये आना पड़ता है। रात में पीडितायें उसी रास्ते से आती हैं, जिससे आने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सचिव द्वारा बाल संरक्षण अधिकारी चन्द्र मोहन वर्मा को आदेशित किया गया कि वन स्टाप सेन्टर में प्रवेश करने हेतु सामने से कोई रास्ता बनवायें। निरीक्षण के दौरान वन स्टाप सेन्टर के रजिस्टरों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान केस रजिस्टर का अवलोकन किया गया। केस रजिस्टर के अवलोकन से विदित हुआ कि सम्बन्धित थाना एवं महिला आरक्षी द्वारा वन स्टाप सेन्टर में दाखिल कराने हेतु जो पीड़िता, महिला आरक्षी द्वारा लायी जाती है, उस महिला आरक्षी का पी0एन0ओ0 नम्बर पीड़िता दाखिला प्रार्थना पत्र में नही होता, जबकि महिला आरक्षी का पी0एन0ओ0 नम्बर केस रजिस्टर में अंकित होता है, जो कि गलत है, जिसके लिये प्रभारी अधीक्षिका/केस वर्कर को सचेत किया गया। इसके अतिरिक्त सम्बन्धित थाना एवं महिला आरक्षी द्वारा पीड़िता को वन स्टाप सेन्टर में दाखिल कराने हेतु जो प्रार्थना पत्र दिया जाता है उसका सम्पूर्ण विवरण केस रजिस्टर में अंकित नही होता, जिसका हुबहू अंकन करने हेतु प्रभारी अधीक्षिका/केस वर्कर को आदेशित किया गया। जनपद गोण्डा के थानों द्वारा पीड़िता को वन स्टाप सेन्टर में दाखिल कराने हेतु जो प्रार्थना पत्र दिया जाता है, उसमें कुछ प्रार्थना पत्रों में पीड़िता की फोटो लगी होती है किन्तु वह फोटो सम्बन्धित थाने के एस0आई0 द्वारा प्रमाणित नही होती है। पीड़िता दाखिला प्रार्थना पत्र में लगी पीड़िता की फोटों को एस0आई0 द्वारा प्रमाणित करने हेतु आदेशित किया गया तथा यह भी आदेषित किया गया कि समस्त पीड़िता दाखिला प्रार्थना पत्र में पीड़िता की फोटों अवश्य चस्पा हो तथा वह फोटो सम्बन्धित एस0आई0 द्वारा प्रमाणित हो। निरीक्षण के दौरान कुछ पीड़िताओं के सुपुर्दगीनामा के अवलोकन से विदित हुआ कि पीड़िता को सुपुर्द, जिस रिश्तेदार/नातेदार को किया जाता है, उसमें उक्त रिश्तेदार/नातेदार का यह अंकन नही होता ‘‘कि वह पीड़िता को अपने साथ ले जा रहे हैं‘‘ जबकि उसके स्थान पर पीड़िता द्वारा स्वयं इस बात का अंकन होता है कि वह उक्त रिश्तेदार/नातेदार के साथ जा रही हैं। प्रभारी अधीक्षिका/केस वर्कर को आदेशित किया गया कि जो व्यक्ति पीड़िता की सुपुर्दगी लेगा, वही इस बात का अंकन करेगा कि वह वन स्टाप सेन्टर में रह रही उक्त पीड़िता को अपने साथ ले जा रहा है। निरीक्षण के दौरान स्टाफ नर्स विनीता द्वारा अवगत कराया गया कि पिछले सात माह से यहां पर कोई भी प्रेग्नेंसी टेस्ट किट नही है, जबकि प्रत्येक माह कम से कम 25 से 30 प्रेग्नेंसी टेस्ट किट की जरूरत पड़ती है। बाल सरंक्षण अधिकारी चन्द्र मोहन वर्मा को आदेशित किया गया कि प्रत्येक माह वन स्टाप सेन्टर में कम से कम 30-35 प्रेग्नेंसी टेस्ट किट उपलब्ध करायें।
निरीक्षण के दौरान प्रभारी अधीक्षिका/केस वर्कर श्रीमती स्वाती पाण्डेय, स्टाफ नर्स विनीता, कम्प्यूटर आपरेटर रिचा तिवारी, मल्टी पर्पज अर्चना उपाध्याय व प्रदीप कुमार, वन स्टाप सेन्टर चैकी की महिला आरक्षी संजू यादव व रीना वर्मा तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गोण्डा के कनिष्ठ लिपिक अंकित वर्मा व पराविधिक स्वयं सेवक रहमत अली उपस्थित रहे।
