आप हैं परेशान, तो चले आइए हठीले शाह दरगाह, मांगे मन्नते पूरी होगी
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रौजा (गोंडा ) अगर आपको किसी मुकदमे ने परेशान कर रखा है,औलाद नहीं है, नौकरी की चाहत है, अथवा कोई पारिवारिक उलझनों को दूर करने की चाहत लेकर दरगाह शरीफ में जियारत को पहुंचता है। तो यहां पर मुराद मांगने के लिए कौड़ी फेंकने की परंपरा है।
दरगाह शरीफ मेले में मजार पर पलंग पीढ़ी के साथ निशान पेश किया जाता है। यहां नेपाल, बनारस, सुल्तानपुर, अमेठी, जौनपुर, गोरखपुर, आजमगढ़, संतकबीरनगर, बस्ती, हठीले शाह अंबेडकरनगर, रायबरेली, अयोध्या, प्रतापगढ़, सिद्धार्थनगर, गोंडा, मुंबई, दिल्ली, बिहार, बंगाल समेत कई अन्य राज्यों व जनपदों से जायरीन अपनी मुरादें लेकर आते हैं। आजमगढ़ के जायरीन शिवकुमार काफी समय से एक मुकदमे को लेकर परेशान हैं। करीब 20 साल से मुकदमा चल रहा है। यहां आने पर उन्होंने मजार की गुंबद पर कौड़ी फेंककर मुकदमे के खत्म होने की दुआ की है। बिहार बेगूसराय के राम निवास को शादी के 10 साल बाद भी औलाद नहीं हुई। गाजी की मजार पर जियारत कर औलाद मांगी है। अगर बेटा या बेटी पैदा होती है तो वह परिवार के साथ आकर कव्वाली सुनने के साथ जियारत करेंगे।
हठीले शाह की मजार पर रहमान एक दशक से बेच रहे कौड़ी,
दरगाह में मजार के पास मोहम्मद रहमान कौड़ी बेचते मिले। वह वर्ष 2000 से कौड़ी बेचने का काम कर रहे हैं। एक ढेर में नौ से दस कौड़ियां होती है। इसके लिए 10 रुपये लिए जाते हैं। जिस व्यक्ति की कौड़ी गुंबद के सबसे ऊपरी हिस्से पर लगती है, उसकी मुराद पूरी होती है।
2012 से करा रहे मरम्मत
मजार के निकट ही राजस्थान के मकराना निवासी वली अहमद मजार पर मार्बल पत्थर लगाने का काम कराते मिले। बताया कि वर्ष 2012 से वह मजार के अंदर और बाहरी हिस्से में पत्थर लगाने का काम कराते हैं। गुंबद की मीनार पर लोग कौड़ी फेंक अपनी मन्नत मांगते आ रहे हैं। यह सिलसिला कई सालों से चल रहा है। जिसकी मुराद पूरी होती है, वह अपनी सुविधा के अनुसार यहां पर दोबारा हाजिरी लगाने आता है। यहां तमाम प्रकार की बीमारियो के बारे मे भी मन्नते मानी जाती हैं. लीला, सफ़ेद दाग़ जैसी बीमारियाँ भी ठीक हो जाती हैं।
