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गोंडा : आपस में मनमुटाव होने के कारण एक ही कक्षा में पढ़ने वाली दो छात्राओं को शिक्षक बलजीत सिंह कनौजिया ने कराया एक छात्राएं बोली यह दोस्ती अब नहीं छोड़ेंगे

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गोंडा : आपस में मनमुटाव होने के कारण एक ही कक्षा में पढ़ने वाली दो छात्राओं को शिक्षक बलजीत सिंह कनौजिया ने कराया एक छात्राएं बोली यह दोस्ती अब नहीं छोड़ेंगे

मोहम्मद सुलेमान /सलाहुद्दीन सिद्दीकी
गोंडा ( युगनव टाइम्स लाइव ) शिक्षा क्षेत्र मनकापुर मे
इनसे मिलिए यह हैं कम्पोजिट विद्यालय सोनबरसा बक्सरा आज्ञाराम मनकापुर की पूनम और लक्ष्मी दोनों कक्षा सातवीं की छात्राएं हैं। घनिष्ठ मित्र थीं।किसी कारण से आपस में कुछ अनबन हो गई जिससे यह दोनों कई दिनों से एक दूसरे से बात तक नहीं कर रही थीं। दोनों रुआंसी सी सूरत लिए हुए अलग अलग बैठी थीं।आज शिक्षक बलजीत सिंह को जानकारी मिली तो शिक्षक ने इनको पुनः एक करने के लिए सोचने लगा।काफी देर तक तमाम सारे उदाहरण दिए। समझाने की कोशिश की। यही भी बताया कि यह इन बच्चियों का संस्कार ही है कि इनमें कई दिनों से अनबन चली आ रही थी फिर भी अपना गुस्सा व गम लिए अपने अंदर ही छुपाए रखीं।इनके स्थान पर यदि कोई दो लड़के होते तो वे झगड़ बैठते। जिससे सभी को अपने आप ये जानकारी हो जाती कि इन दो बच्चों में कोई अनबन हो गई है।ये उदाहरण केवल इन दो बच्चियों का नहीं है पता नहीं ऐसा हमारे यहां ही है या अन्य स्कूलों में भी ऐसा है कि जब छात्राओं में अन बन होती है तो किसी को पता तक नहीं चलता।बस ये आपस में थोड़ा दूरी बना लेती हैं।आपस में बोलचाल बंद कर देती हैं।और हफ्ते दस दिन बाद स्वत: एक हो जाती हैं।
ये तो रही भूमिका लेकिन समस्या का हल अभी नहीं हुआ था।उसका उपाय करना था।यह मेरा इन बच्चों से लगाव ही है कि मेरा मन भी अंदर से द्रवित था।यह सोचकर कि इन दोनों में अनबन कैसे हो गया।एक दूसरे को बहुत पसंद करती थीं एक दूसरे की भावनाओं की कद्र करती थीं। पढ़ाई लिखाई नाट्य मंचन गीत संगीत में इन दोनों का क्लास में कोई सानी नहीं था।
समस्या समाधान हेतु मैंने पुराना फंडा इस्तेमाल करने के लिए सोचा लेकिन थोड़ा हटकर। हमारी जानकारी में ऐसा कुछ था कि जब दो लड़कियां या औरतें आपस में मित्रता करती हैं तो मीठे पान की व्यवस्था करती हैं।और दोनों एक साथ पान को काट कर खाती हैं।बस इसी फंडे को थोड़ा अलग ढंग से करने के लिए सोचा। मैंने बच्चों से चाकलेट मंगवाया। और दोनों को एक साथ चाकलेट खाने के लिए तैयार किया गया।ये बच्चियां तो केवल अवसर की तलाश में थीं।कि कोई तो उन्हें एक करने की पहल करें।अब ये जो एक आगे बैठी थी और दूसरी पीछे बैठी थी दोनों एक साथ बैठ गईं।और यही नहीं मोबाइल में कैद किए गए इस क्षण को दोनों ने इतमिनान से देखा मन ही मन खुश भी हुई और अपने पर हंसी भी।

रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ेव चटकाया।
टूटे से फिर न जुड़े, जुड़े गांठ पड़ जाय।

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