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October 3, 2026

Yugnav Times live

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कड़ी धूप की तपिश में खुदा की इबादत भारी, पाक परवरदिगार भी इबादत गुजार रोजेदार बंदे को बदले में रहमतों और बरकतों से नवाजता है ——– कारी आरिफ, तरावीह इमाम, मस्जिद रुहानी वजीरगंज

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वजीरगंज( गोंडा ) इस्लाम अनुयायियों के लिए मुकददस रमजान के महीने में बंदे अल्लाह की इबादत में मश्गूल है। कुरआन-ए-पाक की तिलावत मस्जिद और घरों में हो रही है। मौसम के तेवर में कोई नर्मी नहीं है, ऐसा लग रहा है कि रोजेदारों और सूरज की तपिश में मानों जंग चल रही हो। हालांकि इस जंग में पलड़ा रोजेदारों का भारी है।
भीषण गर्मी में रोजेदार बुलंद हौसले से सहरी और इफ्तार कर रहे हैं। तरावीह की नमाज जारी है। बाजार में चहल-पहल बढ़ी है। चांद रात से ही गौसिया जामा मस्जिद वजीरगंज, शाही मस्जिद डिहवा , सब्जपोश मस्जिद बौगड़ा, अहले सुन्नत गुलशने बगदाद मस्जिद रसूलपुर आदि में तरावीह नमाज के दौरान कुरआन शरीफ सुनने से शुरू हो गई। इस मौके पर हाफिज मोहम्मद आरिफ , हाफिज मोहम्मद, कमाल अहमद , हाफिज समसुद्दीन समेत अन्य उपस्थित रहे।

रमजान सब्र का महीना,सब्र का सवाब जन्नत
‘‘ पैगम्बर-ए-इस्लाम ने मुख्तलिफ मौकों पर रमजानुल मुबारक की फजीलत बयान फरमाई है और इसकी अजमत और अहमियत दिलों में बिठाई है। असल में यह महीना सब्र का है, सब्र का सवाब जन्नत है। यह हमदर्दी व गम ख्वारी का महीना है। रमजान के महीने में की गई इबादत व नेकी का सवाब कई गुना हो जाता है। इस्लाम के पांच बुनियादी वसूल में रोजा भी एक है। इस अमल के लिए माह-ए-रमजान मुकर्रर है। पाक परवरदिगार भी इबादत गुजार रोजेदार बंदे को बदले में रहमतों और बरकतों से नवाजता है।’’
मौलाना हामिद रजा

रूह की तरबियत-पाकीजगी के लिए है माह-ए- रमजान
‘‘जिस्म और रूह से मिलकर इंसान बना है। यूं तो साल भर इंसान खाना-पीना और जिस्मानी व दुनियावी जरूरतों का ख्याल रखता है, लेकिन मिट्टी के बने इंसान में असल चीज तो उसकी रूह होती है। अल्लाह ने रूह की तरबियत और पाकीजगी के लिए माह-ए-रमजान बनाया है। आज हम एक ऐसे दौर से गुजर रहें हैं। जहां इंसानियत दम तोड़ रही और खुदगर्जी हावी हो रही है। ऐसे में माह-ए-रमजान का महीना इंसान को अपने आप के अंदर झांकने और खुद की खामियों को दूर कर नेक राह पर चलने का मौका देता है।


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