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नवाबगंज में भागवत कथा का पांचवा दिन: संगीतमय प्रस्तुति में डूबे भक्त, पूतना व संकटासुर वध का श्रवण

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संजय कुमार प्रजापति एडवोकेट

नवाबगंज, गोण्डा: नगर के कहरान मोहल्ले में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन भक्ति और संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा वाचक पंडित रविन्द्र पाण्डेय ने संगीतमय भजनों के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालुओं को भगवान श्री कृष्ण की मनमोहक बाल लीलाओं का रसपान कराया। “मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना भूल जाने के काबिल नही है” भजन पर श्रोता भाव विभोर होकर मुग्ध हो गए।

व्यासपीठ से अमृतवाणी प्रवाहित करते हुए कथा वाचक रविन्द्र पाण्डेय ने भक्तों को उस दिव्य कालखंड में ले जाया, जब नटखट नंदकिशोर अपनी बाल सुलभ क्रीड़ाओं से ब्रजभूमि को अपनी बाल लीलाओं से आनंदित कर रहे थे।

कथा के क्रम में, पंडित पाण्डेय ने कंस के अत्याचारों का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार मथुरा का क्रूर राजा अपनी मृत्यु के भय से व्याकुल था और देववाणी की भविष्यवाणी सुनकर अपनी बहन देवकी और बहनोई वसुदेव को कारागार में डाल दिया तथा उनके नवजात शिशुओं की निर्मम हत्याएं कीं।

इसके पश्चात, भगवान विष्णु के श्रीकृष्ण रूप में अवतार लेने और उनकी रक्षा के लिए हुई अद्भुत लीलाओं का वर्णन किया गया। इसी क्रम में, कंस द्वारा भेजी गई राक्षसी पूतना का प्रसंग आया। कथा वाचक ने भावविभोर होकर पूतना के कपट और भगवान कृष्ण की सर्वज्ञता का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार अंतर्यामी कृष्ण ने न केवल विष का पान किया बल्कि पूतना के प्राण भी हर लिए। इस घटना को अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक बताया गया, जिससे यह सीख मिलती है कि बुराई चाहे कितना भी आकर्षक रूप धारण कर ले, सत्य के आगे उसकी पराजय निश्चित है।

कथा आगे बढ़ी और संकटासुर नामक अन्य असुर का वर्णन आया, जिसे कंस ने गोकुल में उत्पात मचाने और कृष्ण को मारने के लिए भेजा था। बाल कृष्ण ने अपने सखाओं के साथ खेलते हुए भी अपनी दिव्य शक्ति का प्रदर्शन किया और उस असुर का वध कर डाला। इस लीला ने भगवान की बाल लीलाओं में उनकी अद्भुत शक्ति और अपने साथियों की रक्षा करने की भावना को दर्शाया।

कथा वाचक ने युवावस्था में कृष्ण द्वारा मथुरा लौटने और अपने मामा कंस का वध करने की कथा का भी संक्षिप्त उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह घटना कंस के अत्याचारों का अंत और मथुरा के लोगों के लिए न्याय और शांति की स्थापना का प्रतीक थी।

पंडित रविन्द्र पाण्डेय ने अपने मधुर संगीत के माध्यम से श्रोताओं का मन मोह लिया। उनके द्वारा गाए गए भजन “तेरी मंद मंद मुस्कनिया पर, बलिहार जाऊं मैं। मोहन तेरी मधुर मुरलिया पर, बलिहार जाऊं मैं।” ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

अंत में, आरती और प्रसाद वितरण के साथ पांचवें दिन की कथा का समापन हुआ। भक्तगण भगवान की मनमोहक बाल लीलाओं के मधुर स्मरणों के साथ अपने घरों को लौटे। इस अवसर पर मुख्य यजमान राम नरायन, राकेश गुप्ता, राम किशोर, धर्मेंद्र, रवि निगम, अभिषेक सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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