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October 4, 2026

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आत्मा को झकझोर गया नाटक “शरशय्या का प्रायश्चित”

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मोहम्मद सुलेमान
गोंडा ।  लखनऊ की अनादि सांस्कृतिक,शैक्षिक एवं सामाजिक संस्था द्वारा गोंडा महोत्सव के अंतर्गत  महाभारत कथा पर आधारित श्रीमती निर्मला सिंह लिखित एवं श्रीमती मुन्नी देवी निर्देशित नाटक “शरशैय्या का प्रायश्चित” का सफल मंचन किया गया l
नाटक महाभारत युद्ध के समाप्त होने के बाद की कथा पर आधारित है । भीष्म जी इक्छा मृत्यु के वरदान के कारण बाणो की शय्या पर लेटे हुए हैं । सूर्य उत्तरायण दिशा में आ चुका है और अक्षय तृतीया लगते ही भीष्म जी अपने प्राण छोड़ देंगे । सभी के मन में प्रश्न हैं जो वो भीष्म जी से पूछना चाहते हैं । विदुर जी की सलाह पर ध्रतराष्ट्र,गांधारी,पांच पांडव,द्रोपदी,दासी और श्री कृष्ण  जी भीष्म जी के अंतिम दर्शन करने एवं राजनीती की उचित सलाह लेने के लिए जाते हैं ।
भीष्म जी के नारी महिमा का बखान करने पर द्रोपदी पूछती है कि मुझे आपकी नारी सम्मान की बात पर भ्रम है । आपने स्वयं काशी नरेश की राजकुमारियों को बलपूर्वक स्वयम्बर सभा से आपने राज्य के लिए ले आये थे । आपने उन राजकुमारियों से उनकी इक्छा नहीं पूछी थी । भरी सभा में मेरा वस्त्र हरण किया गया परन्तु आप चुप चाप बैठे रहे । इस पर कुंती कहती है भीष्म जी ने  आजीवन ब्रह्मचर्य रहते हुए हस्तिनापुर की गद्दी की रक्षा का वचन दिया था न कि नारी जातिके स्वाभिमान की रक्षा का ।
दासी पूछती है कि की युद्ध में सैनिको को सोचने का कोई अधिकार नहीं है,यदि सैनिको को पता हो कि ये युद्ध अनुचित लड़ा जा रहा है,तो क्या वो युद्ध लड़ने से मना नहीं कर सकते ? इस युद्ध में कौरव सेना से मेरे पति और पांडव सेना से मेरे भाई और पिता मरे गए । भीष्म जी कहते हैं सैनिको को सोचने का कोई अधिकार नहीं है क्योकि वो उस राज्य से धन लेरहे होते हैं और बंधे होते है ।
अंत में द्रोपदी श्रीकृष्ण से कहती है कि यदि आप चाहते तो युद्ध रुक सकता था । इस पर श्री कृष्ण कहते हैं कि सभी प्राणी अपने – अपने कर्मो से बंधे हैं और उसी का फल भोगते हैं । गीता के श्लोक  “यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत”…..के साथ नाटक समाप्त होता है ।
नाटक में मंच पर ,संदीप देव,मनोज वर्मा,विशाल श्रीवास्तव,वैभव कश्यप,गुरुदत्त पाण्डेय,गुलशन यादव, विनीता सिंह,निरुपमा राहुल,मोनिका अग्रवाल,कोमल् प्रजपति,बसन्त् मिश्राऔर सूरज गौतम ने सशक्त अभिनय किया l नाटक में  संगीत आदित्य मिश्रा ,मुख सज्जा राज किशोर गुप्ता,संगीत अमित मुखर्जी,महिला गायन संध्या मुखर्जी,गीत अज़हर सिद्दीकी का सशक्त था ।


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