500 मुकदमों और जमीन घोटाले के आरोपों में उलझा ऐली परसौली, किसानों ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार
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18 साल से अधर में चकबंदी
500 मुकदमों और जमीन घोटाले के आरोपों में उलझा ऐली परसौली,
किसानों ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार
उमरी बेगमगंज। तहसील तरबगंज के बाढ़ प्रभावित ग्राम ऐली परसौली में वर्ष 2008 में शुरू हुई चकबंदी प्रक्रिया 18 वर्ष बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। ग्राम समाज की भूमि से जुड़े सैकड़ों विवादित मामलों और अभिलेखीय गड़बड़ियों के चलते चक निर्माण का कार्य अधर में लटका हुआ है। लंबे इंतजार से परेशान किसानों ने अब जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर चकबंदी प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कराने की मांग की है।
सरयू नदी के तटीय क्षेत्र में बसे ऐली परसौली गांव की भौगोलिक स्थिति चकबंदी की राह में बड़ी चुनौती बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार नदी का प्रवाह समय-समय पर दिशा बदलता रहता है, जिससे कटान और भू-क्षेत्र में बदलाव होता रहता है। यही कारण है कि ग्राम सभा की बड़ी मात्रा में भूमि प्रभावित होती रही है। वर्ष 1998 में सरकार ने इस बाढ़ प्रभावित गांव में चकबंदी लागू करने का गजट जारी किया था, इसके पश्चात दिसंबर 2008 में विधिवत चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुई थी।
चकबंदी विभाग ने धारा 4(2) का प्रकाशन, मालियत निर्धारण, पर्चा-5 का वितरण तथा धारा-11 की कार्रवाई पूरी कर ली थी। इसके बाद चक निर्माण का कार्य शुरू हुआ, लेकिन आज तक अंतिम रूप नहीं ले सका। गांव में लगभग 3200 से अधिक खातेदार हैं और इसकी सीमाएं अयोध्या जनपद से जुड़ती हैं।मामले को लेकर किसान विश्वनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि जिम्मेदार अधिकारी जनता को लगातार गुमराह कर रहे हैं और वर्षों से लंबित प्रक्रिया को पूरा करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। सेवानिवृत्ति प्रधानाचार्य अयोध्या सिंह ने कहा कि चकबंदी पूरी न होने से किसानों को भूमि संबंधी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में इसी वजह से किसने की फार्मर रजिस्ट्री नहीं बन पा रही है। जिससे आने वाले समय में खाद का संकट ग्रामीणों के लिए खड़ा हो सकता है।
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500 मुकदमों में फंसी ग्राम समाज की जमीन
सहायक चकबंदी अधिकारी श्रीकांत गौड़ ने बताया कि वर्तमान गाटा संख्याओं का मिलान फसली वर्ष 1359 की खतौनी से किया जा रहा है जो लगभग पूरा हो चुका है वही जोत चक आकार पत्र 23 कंप्लीट किया जा चुका है। गैर विवादित चक की पैमाइश की कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा ग्राम समाज की भूमि से जुड़े लगभग 500 मुकदमे चकबंदी अधिकारी न्यायालय में विचाराधीन हैं। इन मामलों के निस्तारण और अभिलेखों के शुद्धीकरण के बाद ही इन चकों के निर्माण की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सकेगी।
पट्टों में भारी अनियमितताओं के आरोप
पूर्व प्रधान प्रतिनिधि सुरजीत सिंह ने चकबंदी में देरी के पीछे पूर्व में हुए भूमि आवंटन घोटालों को भी जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि कुछ पूर्व लेखपालों ने वर्ग-6 की भूमि, नदी, तालाब और खलिहान जैसी सार्वजनिक संपत्तियों तक का मनमाने तरीके से पट्टा आवंटित कर दिया। आरोप है कि कई मामलों में उपलब्ध रकबे से दोगुनी भूमि तक का आवंटन कर दिया गया, जिससे बड़े पैमाने पर विवाद खड़े हो गए।
स्थानीय निवासी देशराज सिंह ने बताया कि एक लेखपाल ओम प्रकाश गुप्ता ने 2016 में बंदोबस्त के कुछ पर्चो को फाड़ कर 23 व्यक्तियों के पक्ष में 365 बीघा भूमि कंप्यूटराइज्ड तरीके से नामांकित कर दी। इस बात का खुलासा होते ही विभाग में हड़कंप मच गया और आनन फानन लेखपाल सहित 23 लोगों के विरुद्ध विभागीय जांच के उपरांत धोखाधड़ी सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लेखपाल सहित कई लाभांवित व्यक्तियों को जेल भेज दिया गया। मुकदमा अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है।
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चकबंदी नहीं, किसानों के लिए बनी अनिश्चितता की कहानी
करीब दो दशक से लंबित चकबंदी प्रक्रिया अब ग्रामीणों के लिए प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बन चुकी है। किसान सवाल उठा रहे हैं कि जब चकबंदी का उद्देश्य भूमि विवादों का समाधान और कृषि व्यवस्था को सुव्यवस्थित करना था, तो आखिर 18 वर्षों बाद भी यह प्रक्रिया अपने अंतिम पड़ाव तक क्यों नहीं पहुंच सकी। अब निगाहें शासन और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस लंबे समय से लंबित मामले में क्या कदम उठाते हैं।
