औरतों का सबसे कीमती गहना उनकी हया है, माएं अपने बच्चों की इस्लाह करें
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औरतों का सबसे कीमती गहना उनकी हया है, माएं अपने बच्चों की इस्लाह करें
अशफाक आलम
गौरा चौकी गोंडा
जुम्मेरात को “मदरसा फैज़ुल उलूम इस्लामिया, कोल्ही गरीब” में महिलाओं के लिए एक शानदार और ईमान अफ़रोज़ प्रोग्राम का आयोजन किया गया। प्रोग्राम में शामिल होने वाली महिलाओं की संख्या देखकर दिल खुशी से भर गया। आस-पास के इलाक़ों से मांएं, बहनें बड़े प्यार और शौक के साथ तशरीफ लाईं।
प्रोग्राम की शुरुआत क़ुरआन पाक की तिलावत से हुई। इसके बाद मौलाना अब्दुल करीम साहब क़ासमी गोंडवी ने बहुत ही दर्द भरी और हिकमत से भरी बातें फरमाईं। ईमान लाने के बाद औरतों पर जो पहली ज़िम्मेदारियां आती हैं, उन पर खास तौर पर रौशनी डाली। अकाबिर उलमा-ए-कराम की नसीहतों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक औरत की सबसे बड़ी पूंजी उसकी हया, नमाज़ और अपने घर की इस्लाह (सुधार) है।
मौलाना हबीबुल क़ुद्दूस साहब क़ासमी इमाम व खतीब जामा मस्जिद बंगलोर ने औलाद की सही तरबियत, मियां-बीवी के आपसी हक़ूक़ और घरेलू जिंदगी में सब्र और शुक्र की अहमियत को बड़े प्यार और नरमी से बयान किया। पाँच वक़्त की नमाज़ की पाबंदी को ईमान की निशानी बताते हुए हर औरत को यह अहद (वादा) करने की तरगीब दी कि वह अपने घर का माहौल दीनदार बनाए, बच्चों को नेकियों की तरफ़ ले जाएं और खुद दीन की चलती-फिरती तस्वीर बने।
यह रूहानी कार्यक्रम न सिर्फ़ इल्म का खज़ाना था बल्कि हर शामिल होने वाली बहन के दिल में ईमान की नई रौशनी जगा गया। दुआ है कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इस प्रोग्राम को कुबूल फरमाए और हमारी मांओं-बहनों की ज़िंदगी में दीन की बहारें अता फरमाएं l
